आंखो शायरी – Aakho Shayari in Hindi

Aakho Shayari

वो आँखों आँखों में करते हैं इस तरह बातें
कि कानों कान किसी को ख़बर नहीं होती !

गँवाए बैठे हैं आँखों की रौशनी शाहिद
जहाँ पनाह का इंसाफ़ देखने वाले !

वही आँखों में और आँखों से पोशीदा भी रहता है
मिरी यादों में इक भूला हुआ चेहरा भी रहता है !

आँखों में नहीं सिलसिला ए अश्क शब ओ रोज़
तस्बीह पढ़ा करते हैं दिन रात तुम्हारी !

न मर के भी तिरी सूरत को देखने दूँगा
पड़ूँगा ग़ैर की आँखों में वो ग़ुबार हूँ मैं !

सारे जज़्बे तिरी चाहत के दिखाई देते
काश आँखों में कहीं दिल भी धड़कता होता !

जाने वाले ने हमेशा की जुदाई दे कर
दिल को आँखों में धड़कने के लिए छोड़ दिया !

हाथों से दिल ओ दीदा के आया हूँ निपट तंग
आँखों को रोऊँ या मैं करूँ सरज़निश ए दिल !

जुम्बिश ए मेहर है हर लफ़्ज़ तिरी बातों का
रंग उड़ता नहीं आँखों से मुलाक़ातों का !

पी रहा हूँ आँखों आँखों में शराब
अब न शीशा है न कोई जाम है !

आँखों में दमक उट्ठी है तस्वीर ए दर ओ बाम
ये कौन गया मेरे बराबर से निकल कर !

है ता हद्द ए इम्काँ कोई बस्ती न बयाबाँ
आँखों में कोई ख़्वाब दिखाई नहीं देता !

ऐ ख़्वाब ए पज़ीराई तू क्यूँ मिरी आँखों में
अंदेशा ए दुनिया की ताबीर उठा लाया !

बदन के कर्ब को वो भी समझ न पाएगा
मैं दिल में रोऊँगी आँखों में मुस्कुराऊँगी !

आँखें यूँ ही भीग गईं क्या देख रहे हो आँखों में
बैठो साहब कहो सुनो कुछ मिले हो कितने साल के बाद !

बजाए सीने के आँखों में दिल धड़कता है
ये इंतिज़ार के लम्हे अजीब होते हैं !

आँखों में घुल न जाएँ कहीं ज़ुल्मतों के रंग
जिस सम्त रौशनी है उधर देखते रहो !

दिल में दुख आँखों में नमी आसमाँ पर घटाएँ
अंदर बाहर इस ओर उस ओर हर ओर बादल !

आँखों में न ज़ुल्फ़ों में न रुख़्सार में देखें
मुझ को मिरी दानिश मिरे अफ़्कार में देखें !

रोए हुए भी उन को कई साल हो गए
आँखों में आँसुओं की नुमाइश नहीं हुई !