आप शायरी | Aap Shayari

Aap Shayari | आप शायरी

Aap Shayari In Hindi | आप शायरी हिंदी में

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Aap Shayari In Hindi | आप शायरी हिंदी में

Aap Shayari
शाइरी कार ए जुनूँ है आप के बस की नहीं
वक्त पर बिस्तर से उठिए वक्त पर सो जाइए

आप से याद आप की अच्छी
आप तो हम को भूल जाते हैं

था अनल हक लब ए मंसूर पे क्या आप से आप
था जो पर्दे में छुपा बोल उठा आप से आप

खूब तमाशा हम को बनाया आप तमाशा आप हुए
हम को रुस्वा करने निकले कैसे रुस्वा आप हुए

बद गुमाँ आप हैं क्यूँ आप से शिकवा है किसे
जो शिकायत है हमें गर्दिश ए अय्याम से है

मिल भी जाओ यूँही तुम बहर ए खुदा आप से आप
जिस तरह हो गए हो हम से खफा आप से आप

आप ही की है अदालत आप ही मुंसिफ भी हैं
ये तो कहिए आप के ऐब ओ हुनर देखेगा कौन

मा नी ओ सूरत वहदत ओ कसरत जर्रा ओ सहरा आप हुए
आप तो कुछ होते ही नहीं थे कहिए क्या क्या आप हुए

आप से अब क्या छुपाना आप कोई गैर हैं
हो चुका हूँ मैं किसी का आप भी हो जाइए

आप ही आप दिए बुझते चले जाते हैं
और आसेब दिखाई भी नहीं देता है

आप हक गोई की जो चाहें सजा दें मुझ को
आप खुद जैसे हैं वैसा ही कहा है मैं ने

आप से चूक हो गई शायद
आप और मुझ पे मेहरबाँ क्या खूब

देखिए अब न याद आइए आप
आज कल आप से खफा हूँ मैं

आप शर्मा के न फरमाएँ हमें याद नहीं
गैर का जिक्र है ये आप की रूदाद नहीं

गलत है आप का अंदाजा ए नजर कस्री
बुरा जरूर हूँ पर इस कदर बुरा भी नहीं

इश्क कुछ आप पे मौकूफ नहीं खुश रहिए
एक से एक जमाने में तरहदार बहुत

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