Aarzoo Shayari आरजू शायरी हिंदी में (2022-23)

Aarzoo Shayari In Hindi | आरजू शायरी हिंदी में

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Aarzoo Shayari

शायद वो भूली बिसरी न हो आरजू कोई
कुछ और भी कमी सी है तेरी कमी के साथ

ये आरजू है कि अब कोई आरजू न रहे
किसी सफर किसी मंजिल की जुस्तुजू न रहे

कहीं दाम ए सब्जा ए गुल मिला कहीं आरजू का चमन खिला
तिरे हुस्न को ये खबर भी है मैं कहाँ कहाँ से गुजर गया

ये तेरी आरजू में बढ़ी वुसअत ए नजर
दुनिया है सब मिरी निगह ए इंतिजार में
Ye Teree Aarajoo Mein Badhee Vusat E Najar
Duniya Hai Sab Miree Nigah E Intijaar Mein

वह शक्ल वह शनाख्त वह पैकर की आरजू
पत्थर की हो के रह गई पत्थर की आरजू

तुम्हारी आरजू में मैं ने अपनी आरजू की थी
खुद अपनी जुस्तुजू का आप हासिल हो गया हूँ मैं

होती कहाँ है दिल से जुदा दिल की आरजू
जाता कहाँ है शम्अ को परवाना छोड़ कर

मेरी ये आरजू है वक्त ए मर्ग
उस की आवाज कान में आवे

Main Aur Us Guncha Dahan Kee Aarajoo
Aarajoo Kee Saadagee Thee Main Na Tha
मैं और उस गुंचा दहन की आरजू
आरजू की सादगी थी मैं न था

आरजू लुत्फ तलब इश्क सरासर नाकाम
मुब्तला जिंदगी ए दिल इन्हीं औहाम में है

न हो आरजू कुछ यही आरजू है
फकत मैं ही मैं हूँ तो फिर तू ही तू है

मुद्दत से आरजू है खुदा वो घड़ी करे
हम तुम पिएँ जो मिल के कहीं एक जा शराब

बुत करें आरजू खुदाई की
शान तेरी है किबरियाई की

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