आशिक शायरी | Aashiq Shayari

आशिक शायरी | Aashiq Shayari

Aashiq Shayari In Hindi | आशिक शायरी हिंदी में

Aashiq Shayari In Hindi (आशिक शायरी हिंदी में) सम्बंधित हर शायरी पोस्ट के अन्दर है.

Aashiq Shayari

इश्क माशूक इश्क आशिक है
यानी अपना ही मुब्तला है इश्क

न आशिक हैं जमाने में न माशूक
इधर हम रह गए हैं और उधर आप

आशिक की सियह रोजी ईजाद हुई जिस दिन
उस रोज से ख्वाबों की ये जुल्फ परेशाँ है

किस कदर दिल से फरामोश किया आशिक को
न कभी आप को भूले से भी मैं याद आया
Kis Kadar Dil Se Pharaamosh Kiya Aashik Ko
Na Kabhee Aap Ko Bhoole Se Bhee Main Yaad Aaya

मर्तबा माशूक का आशिक से बाला दस्त है
खार की जा जेर ए पा गुल का मकाँ दस्तार पर

हुआ है हिन्द के सब्जों का आशिक
न होवें आबरू के क्यूँ हरे बख्त

शम्अ रू आशिक को अपने यूँ जलाना चाहिए
कुछ हँसाना चाहिए और कुछ रुलाना चाहिए

आशिक का खत है पढ़ना जरा देख भाल के
कागज पे रख दिया है कलेजा निकाल के

Kaha Aashik Se Vaakiph Ho To Pharamaaya Nahin Vaakiph
Magar Haan Is Taraph Se Ek Na Maharam Nikalata Hai
कहा आशिक से वाकिफ हो तो फरमाया नहीं वाकिफ
मगर हाँ इस तरफ से एक ना महरम निकलता है

इश्क गोरे हुस्न का आशिक के दिल को दे जला
साँवलों के आशिकों का दिल है काला कोएला

किसी माशूक का आशिक से खफा हो जाना
रूह का जिस्म से गोया है जुदा हो जाना

इस तरह भेस में आशिक के छुपा है माशूक
जिस तरह आँख के पर्दे में नजर होती है

आशिक का बाँकपन न गया बाद ए मर्ग भी
तख्ते पे गुस्ल के जो लिटाया अकड़ गया
Aashik Ka Baankapan Na Gaya Baad E Marg Bhee
Takhte Pe Gusl Ke Jo Litaaya Akad Gaya

आशिक बना के हम को जलाते हैं शम्अ रू
परवाना चाहिए उन्हें परवाना चाहिए

बरहना देख कर आशिक में जान ए ताजा आती है
सरापा रूह का आलम है तेरे जिस्म ए उर्यां में

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