अभिमान शायरी | Abhiman Shayari

Abhiman Shayari | अभिमान शायरी

Abhiman Shayari In Hindi | अभिमान शायरी हिंदी में

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Abhiman Shayari

तेरी जान के दुश्मन हैं
लोभ क्रोध माया अभिमान

अपने ज्ञान का अभिमान तो होता हे
हर किसी को
मगर अपने अभिमान का ज्ञान नहीं होता हे।

खुद पर ए इंसान कभी मत
करना अभिमान
तेरे और मेरे जैसे कितनो को ईश्वर ने
माटी से बनाकर माटी में मिला दिया।

मुझे किसी की जरूरत नहीं पड़ेंगी
ये अभिमान नहीं होना चाहिए
और यह वहम भी नहीं होना चाहिए की
सबको मेरी जरूरत पड़ेंगी।

अभिमान मत करना अपनी हैसियत का कभी
उड़ान जमीन पर शुरू और जमीन पर
ही ख़त्म होती हे।