अधूरा शायरी – Adhura Shayari in Hindi

Adhura Shayari

अधूरे लफ़्ज़ थे आवाज़ ग़ैर वाज़ेह थी
दुआ को फिर भी नहीं देर कुछ असर में लगी !

उलझती जाती हैं गिर्हें अधूरे लफ़्ज़ों की
हम अपनी बातों के सारे अगर मगर खोलें !

जब अधूरे चाँद की परछाईं पानी पर पड़ी
रौशनी इक ना मुकम्मल सी कहानी पर पड़ी !

रम्ज़ अधूरे ख़्वाबों की ये घटती बढ़ती छाँव
तुम से देखी जाए तो देखो मुझ से न देखी जाए !

तुम्हारे बिना सब अधूरे हैं जानाँ
सबा फूल ख़ुश बू चमन रौशनी रंग !

आँधियों का ख़्वाब अधूरा रह गया
हाथ में इक सूखा पत्ता रह गया !

तमाम रंग अधूरे लगे तिरे आगे
सो तुझ को लफ़्ज़ में तस्वीर करता रहता हूँ !

याद उसे भी एक अधूरा अफ़्साना तो होगा
कल रस्ते में उस ने हम को पहचाना तो होगा !

मैं अधूरा सा हूँ उस के अंदर
और वो शख़्स मुकम्मल मुझ में !

मैं ने बचपन में अधूरा ख़्वाब देखा था कोई
आज तक मसरूफ़ हूँ उस ख़्वाब की तकमील में !

ख़ुद अपनी शय पे अधूरा है इख़्तियार मुझे
गिरा तो सकता हूँ आँसू उठा नहीं सकता !

ये कौन मुझ को अधूरा बना के छोड़ गया
पलट के मेरा मुसव्विर कभी नहीं आया !

अधूरा हो के हूँ कितना मुकम्मल
ब मुश्किल ज़िंदगी बिखरा हुआ हूँ !

ये ख़ुद नविश्त तो मुझ को अधूरी लगती है
जो हो सके तो नया इंतिसाब माँगूँ मैं !

अधूरी वफ़ाओं से उम्मीद रखना
हमारे भी दिल की अजब सादगी है !

इस आरज़ी दुनिया में हर बात अधूरी है
हर जीत है ला हासिल हर मात अधूरी है !

अधूरी छोड़ के तस्वीर मर गया वो ज़ेब
कोई भी रंग मयस्सर न था लहू के सिवा !

बख़्श मुझ को न अधूरी कोई नेमत मौला
या तो दरिया ही दे पूरा या तो सहरा सारा !

पूरी न अधूरी हूँ न कम तर हूँ न बरतर
इंसान हूँ इंसान के मेआर में देखें !

मेरे हर मिस्रे पे उस ने वस्ल का मिस्रा लगाया
सब अधूरे शब भर में मुकम्मल हो गए थे !