Ajnabee Shayari अजनबी शायरी हिंदी में (2022-23)

Ajnabee Shayari In Hindi | अजनबी शायरी हिंदी में

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Ajnabee Shayari
अजनबी बूद ओ बाश के कुर्ब ओ जवार में मिला
बिछड़ा तो वो मुझे किसी और दयार में मिला

वो जिस को दूर से देखा था अजनबी की तरह
कुछ इस अदा से मिला है कि दोस्ताना लगे

ये अजनबी सी मंजिलें और रफ्तगाँ की याद
तन्हाइयों का जहर है और हम हैं दोस्तो

दर ओ दीवार इतने अजनबी क्यूँ लग रहे हैं
खुद अपने घर में आखिर इतना डर क्यूँ लग रहा है

वही दो चार चेहरे अजनबी से
उन्हीं को फिर से दोहराना पड़ेगा

जेहन में अजनबी सम्तों के हैं पैकर लेकिन
दिल के आईने में सब अक्स पुराने निकले

अजनबी शहरों में तुझ को ढूँढता हूँ जिस तरह
इक गली हर शहर में तेरी गली जैसी भी है

न अजनबी है कोई और न आश्ना कोई
अकेले पन की भी होती है इंतिहा कोई

अजनबी जान के क्या नाम ओ निशाँ पूछते हो
भाई हम भी उसी बस्ती के निकाले हुए हैं

उस अजनबी से वास्ता जरूर था कोई
वो जब कभी मिला तो बस मिरा लगा मुझे

वो अजनबी तिरी बाँहों में जो रहा शब भर
किसे खबर कि वो दिन भर कहाँ रहा होगा

हम अजनबी हैं आज भी अपने दयार में
हर शख्स पूछता है यही तुम यहाँ कहाँ

ये हम सफर तो सभी अजनबी से लगते हैं
मैं जिस के साथ चला था वो काफिला है कहाँ

वो एक दिन एक अजनबी को
मिरी कहानी सुना रहा था

ऐसा न हो कि ताजा हवा अजनबी लगे
कमरे का एक आध दरीचा खुला भी रख

मैं अब जो हर किसी से अजनबी सा पेश आता हूँ
मुझे अपने से ये वाबस्तगी मजबूर करती है

अजनबी शहर में कुछ खौफ सा महसूस हुआ
ओढ़ ली मैं ने खमोशी से उतारी हुई रात

जिसे भी देखो वही अजनबी सा लगता है
तुम्हारे शहर में कोई भी आश्ना न मिला

गामजन हैं हम मुसलसल अजनबी मंजिल की सम्त
जिंदगी की आरजू में जिंदगी खोते हुए

वो मोड़ जिस ने हमें अजनबी बना डाला
उस एक मोड़ पे दिल अब भी गुनगुनाता है