अम्मी शायरी | Ammi Shayari

Ammi Shayari | अम्मी शायरी

Ammi Shayari In Hindi | अम्मी शायरी हिंदी में

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Ammi Shayari
कहता हूँ अम्मी सास को अब्बा खुसर को मैं
फिर क्यों न जानूँ अपना ही घर उन के घर को मैं

मुझ को यकीं है सच कहती थीं जो भी अम्मी कहती थीं
जब मेरे बचपन के दिन थे चाँद में परियाँ रहती थीं

तहज्जुद में दुआ के फूल काढ़े
मिरी अम्मी का आँचल जागता है

सँभाल रखा था अम्मी ने जिस को मौत तलक
उसी कबाड़ से कुछ तख्तियाँ निकल आईं

अम्मी सूखी रोटी याद दिलाती है
जब मैं पैसा पैसा करने लगता हूँ

जमीन गोल है मेरी वफात ने खोला
कि दोस्त अम्मी से कहते थे ये बड़ा दुख है

लिपट के सो गई कल रात उन के सीने से
भली कुछ ऐसी लगी अम्मी जान की खुशबू

अम्मी कहते हैं हम तो हैं फाजिल
बेवकूफों का दर खुला कहिए

जो अम्मी न रहीं तो क्या हुआ कि हम सब हैं
जवाब बन नहीं पाया तो बाप रोने लगा

उन की अम्मी हो चलीं थीं रफ्ता रफ्ता हम खयाल
हाँ मगर अब्बा का उन के वरगलाना याद है

राख समेटे चूल्हे की वो रोटी अक्सर कहती है
अम्मी के बूढ़े हाथों का जादू माँगे आजादी