Anjaan Shayari अनजान शायरी हिंदी में (2022-23)

Anjaan Shayari In Hindi | अंजान शायरी हिंदी में

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Anjaan Shayari अनजान शायरी हिंदी में (2022-23) In Hindi

Anjaan Shayari
ये शहर है अंजान कहाँ रात गुजारूँ
है जान न पहचान कहाँ रात गुजारूँ

हर शक्ल रफ्ता रफ्ता अंजान हो गई है
मुश्किल थी जो भी जिस की आसान हो गई है

अंजान अगर हो तो गुजर क्यूँ नहीं जाते
पहचान रहे हो तो ठहर क्यूँ नहीं जाते

Anjaan Shayari अनजान शायरी हिंदी में (2022-23) हिंदी में

रस्ते की अंजान खुशी है
मंजिल का अन जाना डर है

Anjaan Shayari अनजान शायरी हिंदी में (2022-23) 2 line

कितने अंजान हैं क्या सादगी से पूछते हैं
कहिए क्या मेरी किसी बात पे रोना आया

ये मोहब्बत कोई अंजान सी शय होती थी
क्या ये कम है कि इसे तेरी बदौलत समझे

दर्द के मौसम का क्या होगा असर अंजान पर
दोस्तो पानी कभी रुकता नहीं ढलवान पर

मुझ सा अंजान किसी मोड़ पे खो सकता है
हादसा कोई भी इस शहर में हो सकता है

ऐसे अंजान बने बैठे हो
तुम को कुछ भी न पता हो जैसे

अंजान तुम बने रहे ये और बात है
ऐसा तो क्या है तुम को हमारी खबर न हो

उस की हर बात समझ कर भी मैं अंजान रही
चाँदनी रात में ढूँडा किया जुगनू वो भी

आँखें ही मिलाती हैं जमाने में दिलों को
अंजान हैं हम तुम अगर अंजान हैं आँखें

जब अपनी सर जमीन ने मुझ को न दी पनाह
अंजान वादियों में उतरना पड़ा मुझे

गर कोई पूछे मुझे आप इसे जानते हैं
हो के अंजान वो कहते हैं कहीं देखा है

कल जो गले मिलते थे मुझ से कल जो मुझे पहचानते थे
आज मुसाफिर जान के कैसे रस्ते वो अंजान हुए

पेड़ों की घनी छाँव और चैत की हिद्दत थी
और ऐसे भटकने में अंजान सी लज्जत थी