आसमान शायरी | Asmaan Shayari

Asmaan Shayari | आसमान शायरी

Asmaan Shayari In Hindi | आसमान शायरी हिंदी में

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Asmaan Shayari

आसमान और जमीं का है तफावुत हर चंद
ऐ सनम दूर ही से चाँद सा मुखड़ा दिखला

बाकी रहे न फर्क जमीन आसमान में
अपना कदम उठा लें अगर दरमियाँ से हम

ऐ आसमान तेरे खुदा का नहीं है खौफ
डरते हैं ऐ जमीन तिरे आदमी से हम

हाँ आसमान अपनी बुलंदी से होशियार
अब सर उठा रहे हैं किसी आस्ताँ से हम

कोई जमीन है तो कोई आसमान है
हर शख्स अपनी जात में इक दास्तान है

मैं आसमान ए मोहब्बत से रुख्सत ए शब हूँ
तिरा खयाल कोई डूबता सितारा है

वो जिस्म रूह खला आसमान है क्या है
कि रंग कोई हो उस से जुदा नहीं मिलता

मिरे सेहन पर खुला आसमान रहे कि मैं
उसे धूप छाँव में बाँटना नहीं चाहता

अब आसमान भी कम पड़ रहे हैं उस के लिए
कदम जमीन पर रक्खा था जिस ने डरते हुए

यूँ जो तकता है आसमान को तू
कोई रहता है आसमान में क्या

डरता हूँ आसमान से बिजली न गिर पड़े
सय्याद की निगाह सू ए आशियाँ नहीं

आसमान पर जा पहुँचूँ
अल्लाह तेरा नाम लिखूँ

नजर आती हैं सू ए आसमाँ कभी बिजलियाँ कभी आँधियाँ
कहीं जल न जाए ये आशियाँ कहीं उड़ न जाएँ ये चार पर

जाहिद सँभल गुरूर खुदा को नहीं पसंद
फर्श ए जमीं पे पाँव दिमाग आसमान पर

बहर ए हस्ती सा कोई दरिया ए बे पायाँ नहीं
आसमान ए नील गूँ सा सब्जा ए साहिल कहाँ

सभों की आ गई पीरी जो तुम जवान हुए
जमीं का दिल हुआ मिट्टी खम आसमान हुए

बरसात का मजा तिरे गेसू दिखा गए
अक्स आसमान पर जो पड़ा अब्र छा गए

रफाकतों का मिरी उस को ध्यान कितना था
जमीन ले ली मगर आसमान छोड़ गया

मैं तुझे फिर जमीं दिखाऊँगा
देख मुझ से न आसमान बिगड़