Aukaat Shayari औकात शायरी हिंदी में (2022-23)

Aukaat Shayari In Hindi | औकात शायरी हिंदी में

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Aukaat Shayari

तेरी मस्जिद में वाइज खास हैं औकात रहमत के
हमारे मय कदे में रात दिन रहमत बरसती है

बाज औकात तिरा नाम बदल जाता है
बाज औकात तिरे नक्श भी खो जाते हैं

सच्चाई वो जंग है जिस में बाज औकात सिपाही को
आप मुकाबिल अपने ही डट जाना पड़ता है

बाज औकात किसी और के मिलने से अदम
अपनी हस्ती से मुलाकात भी हो जाती है

वहम ही वहम में अपनी हुई औकात बसर
कमर ए यार को भूले तो दहन याद आया

तेरी औकात ही क्या मिदहत उल अख्तर सुन ले
शहर के शहर जमीनों के तले दब गए हैं

है वजूद उस का जो कागज पे करे साबित ये
बाज औकात है कागज बड़ा औकात से अब

शाखों से टूट जाएँ वो पत्ते नहीं हैं हम
आँधी से कोई कह दे कि औकात में रहे

तू कादिर ओ आदिल है मगर तेरे जहाँ में
हैं तल्ख बहुत बंदा ए मजदूर के औकात

एक नजर देखा था उस ने आगे याद नहीं
खुल जाती है दरिया की औकात समुंदर में

उन की फरमाइश नई दिन रात है
और थोड़ी सी मिरी औकात है

जान ओ दिल था नज्र तेरी कर चुका
तेरे आशिक की यही औकात है

अच्छी किस्मत अच्छा मौसम अच्छे लोग
फिर भी दिल घबरा जाता है बाज औकात

जर का बंदा हो कि महरूमी का मारा हुआ शख्स
जिस को देखो वही औकात से निकला हुआ है

हाल ए दिल उस को सुना कर है बहुत खुश कौसर
लेकिन अब सोच जरा क्या तिरी औकात रही

सौ चाँद भी चमकेंगे तो क्या बात बनेगी
तुम आए तो इस रात की औकात बनेगी

न वो रिंदान ए खुश औकात न वो बज्म ए वफा
इशरत ए बादा ए गुलफम किसे नज्र करूँ

कैसे जीते हैं ये किस तरह जिए जाते हैं
अहल ए दिल की बसर औकात पे रोना आया

सावन एक महीने कैसर आँसू जीवन भर
इन आँखों के आगे बादल बे औकात लगे