Awara Shayari आवारा शायरी हिंदी में (2022-23)

Awara Shayari In Hindi | आवारा शायरी हिंदी में

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Awara Shayari
जुलेखा बे खिरद आवारा लैला बद मजा शीरीं
सभी मजबूर हैं दिल से मोहब्बत आ ही जाती है

दो आलम से गुजर के भी दिल ए आशिक है आवारा
अभी तक ये मुसाफिर अपनी मंजिल पर नहीं आया

हुआ आवारा हिन्दोस्ताँ से लुत्फ आगे खुदा जाने
दकन के साँवलों ने मारा या इंगलन के गोरों ने

गम ए हयात ने आवारा कर दिया वर्ना
थी आरजू कि तिरे दर पे सुब्ह ओ शाम करें

कब तक इन आवारा मौजों का तमाशा देखना
गिन चुके हो साअतों के तार तो वापस चलो

मिरी तरह से मह ओ महर भी हैं आवारा
किसी हबीब की ये भी हैं जुस्तुजू करते

एक हमें आवारा कहना कोई बड़ा इल्जाम नहीं
दुनिया वाले दिल वालों को और बहुत कुछ कहते हैं

अपने घरों से दूर बनों में फिरते हुए आवारा लोगो
कभी कभी जब वक्त मिले तो अपने घर भी जाते रहना

मैं जेहनी तौर पे आवारा होता जाता हूँ
मिरे शुऊ र मुझे अपनी हद के अंदर खींच

लेता नहीं मिरे दिल ए आवारा की खबर
अब तक वो जानता है कि मेरे ही पास है

तू वो बहार जो अपने चमन में आवारा
मैं वो चमन जो बहाराँ के इंतिजार में है

फिर आई फस्ल कि मानिंद बर्ग ए आवारा
हमारे नाम गुलों के मुरासलात चले

अब्र ए आवारा से मुझ को है वफा की उम्मीद
बर्क ए बेताब से शिकवा है कि पाइंदा नहीं

तू मुझे तंग न कर ए दिल ए आवारा मिजाज
तुझ को इस शहर में लाना ही नहीं चाहिए था

कहीं भी ताइर ए आवारा हो मगर तय है
जिधर कमाँ है उधर जाएगा कभी न कभी

तिरे कलाम ने कैसा असर किया वाइ ज
कि दिल जियादा तर आवारा हो गया वाइ ज

महफिल से उठ जाने वालो तुम लोगों पर क्या इल्जाम
तुम आबाद घरों के वासी मैं आवारा और बदनाम

ये कहीं उम्र ए गुजिश्ता तो नहीं तुम तो नहीं
कोई फिरता है सर ए शहर ए वफा आवारा

इसी मिट्टी से हसब और नसब था अपना
क्यूँ हुए शहर में आवारा बहुत मत पूछो