बारिश शायरी | Baarish Shayari

Baarish Shayari

अजब पुर लुत्फ़ मंज़र देखता रहता हूँ बारिश में
बदन जलता है और मैं भीगता रहता हूँ बारिश में !

बारिश शराब ए अर्श है ये सोच कर अदम
बारिश के सब हुरूफ़ को उल्टा के पी गया !

कितनी दिलकश हैं ये बारिश की फुवारें लेकिन
ऐसी बारिश में मिरी जान भी जा सकती है !

जैसे बारिश से धुले सेहन ए गुलिस्ताँ अमजद
आँख जब ख़ुश्क हुई और भी चेहरा चमका !

रहती है शब ओ रोज़ में बारिश सी तिरी याद
ख़्वाबों में उतर जाती हैं घनघोर सी आँखें !

ग़म की बारिश ने भी तेरे नक़्श को धोया नहीं
तू ने मुझ को खो दिया मैं ने तुझे खोया नहीं !

प्यासो रहो न दश्त में बारिश के मुंतज़िर
मारो ज़मीं पे पाँव कि पानी निकल पड़े !

कच्चे मकान जितने थे बारिश में बह गए
वर्ना जो मेरा दुख था वो दुख उम्र भर का था !

झड़ी ऐसी लगा दी है मिरे अश्कों की बारिश ने
दबा रक्खा है भादों को भुला रक्खा है सावन को !

चले आते हैं बे मौसम की बारिश की तरह आँसू
बसा औक़ात रोने का सबब कुछ भी नहीं होता !

यूँ दिल में आज नूर की बारिश हुई जमील
जैसे कोई चराग़ जला दे बुझा हुआ !

पेड़ों की तरह हुस्न की बारिश में नहा लूँ
बादल की तरह झूम के घर आओ किसी दिन !

उस ने बारिश में भी खिड़की खोल के देखा नहीं
भीगने वालों को कल क्या क्या परेशानी हुई !

बारिश की बहुत तेज़ हवा में कहीं मुझ को
दरपेश था इक मरहला जलने की तरह का !

कहाँ जाती हैं बारिश की दुआएँ
शजर पर एक भी पत्ता नहीं है !

नफ़स नफ़स पे यहाँ रहमतों की बारिश है
है बद नसीब जिसे ज़िंदगी न रास आई !

ये किस की याद की बारिश में भीगता है बदन
ये कैसा फूल सर ए शाख़ ए जाँ खिला हुआ है !

याद आई वो पहली बारिश
जब तुझे एक नज़र देखा था !

शबनम की जगह आग की बारिश हो मगर हम
मंसूर न माँगेंगे दुआ और तरह की !

थोड़ी सी बारिश होती है
कितनी जल्दी भर जाता हूँ !