Baat Shayari बात शायरी हिंदी में (2022-23)

Baat Shayari In Hindi | बात शायरी हिंदी में

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Baat Shayari

खुशी की बात और है गमों की बात और
तुम्हारी बात और है हमारी बात और

वो जो एक बात थी गुफ्तनी वही एक बात शुनीदनी
जिसे मैं ने तुम से कहा नहीं जिसे तुम ने मुझ से सुना नहीं

दिल जहाँ बात करे दिल ही जहाँ बात सुने
कार ए दुश्वार है उस तर्ज में कहना अच्छा

उम्र भर की बात बिगड़ी इक जरा सी बात में
एक लम्हा जिंदगी भर की कमाई खा गया

ये बात बात पे जाहिद जो टूट जाता है
दिल ए हजीं भी हमारा तिरा वुजू क्या है

जब बिगड़ते हैं बात बात पे वो
वस्ल के दिन करीब होते हैं

खालिद मैं बात बात पे कहता था जिस को जान
वो शख्स आखिरश मुझे बे जान कर गया

क्या जरूरी है जू ए शीर की बात
क्यूँ न गंग ओ जमन की बात करें

बात चाहे बे सलीका हो कलीम
बात कहने का सलीका चाहिए

वो शायद कोई सच्ची बात कह दे
उसे फिर बद गुमाँ करना पड़ा है

बात ये है कि बात कोई नहीं
मैं अकेला हूँ साथ कोई नहीं

निगाह ओ दिल से गुजरी दास्ताँ तक बात जा पहुँची
मिरे होंटों से निकली और कहाँ तक बात जा पहुँची

इक तिरी बात कि जिस बात की तरदीद मुहाल
इक मिरा ख्वाब कि जिस ख्वाब की ताबीर नहीं

खुद कुशी जैसी कोई बात नहीं
इक जरा मुझ को बद गुमानी है

लरजती छत शिकस्ता बाम ओ दर से बात करनी है
मुझे तन्हाई में कुछ अपने घर से बात करनी है

शराब बंद हो साकी के बस की बात नहीं
तमाम शहर है दो चार दस की बात नहीं

वक्त बदला सोच बदली बात बदली
हम से बच्चे कह रहे हैं हम नए हैं

हक बात सर ए बज्म भी कहने में तअम्मुल
हक बात सर ए दार कहो सोचते क्या हो

दिल से आती है बात लब पे हफीज
बात दिल में कहाँ से आती है

रहें न रिंद ये जाहिद के बस की बात नहीं
तमाम शहर है दो चार दस की बात नहीं