बचपन शायरी | Bachapan Shayari

Bachapan Shayari | बचपन शायरी

Bachapan Shayari In Hindi | बचपन शायरी हिंदी में

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Bachapan Shayari

खलिश ए इश्क से बचपन है दिल एक तरफ
इस पे या रब गम ए हस्ती भी उठाना है हमें

बचपन ने हमें दी है ये शीरीनी ए गुफ्तार
उर्दू नहीं हम माँ की जबाँ बोल रहे हैं

बचपन में शौक से जो घरौंदे बनाए थे
इक हूक सी उठी उन्हें मिस्मार देख कर

मैं ने बचपन की खुशबू ए नाजुक
एक तितली के संग उड़ाई थी

दुआएँ याद करा दी गई थीं बचपन में
सो जख्म खाते रहे और दुआ दिए गए हम

मैं ने बचपन में अधूरा ख्वाब देखा था कोई
आज तक मसरूफ हूँ उस ख्वाब की तकमील में

हम को बचपन ही से इक शौक था बर्बादी से
नाम लिख लिख के मिटाते थे जमीं पर अपना

बूढ़ी माँ का शायद लौट आया बचपन
गुड़ियों का अम्बार लगा कर बैठ गई

हसीं यादें वो बचपन की कहीं दिल से न खो जाएँ
मैं अपने आशियाने में खिलौने अब भी रखता हूँ

बचपन में आकाश को छूता सा लगता था
इस पीपल की शाखें अब कितनी नीची हैं

मैं बचपन में खिलौने तोड़ता था
मिरे अंजाम की वो इब्तिदा थी

कई सितारों को मैं जानता हूँ बचपन से
कहीं भी जाऊँ मिरे साथ साथ चलते हैं

इन से वाबस्ता है मिरा बचपन
मैं खिलौनों की कद्र करता हूँ

कितना आसान था बचपन में सुलाना हम को
नींद आ जाती थी परियों की कहानी सुन कर

अब तक हमारी उम्र का बचपन नहीं गया
घर से चले थे जेब के पैसे गिरा दिए

बचपन में हम ही थे या था और कोई
वहशत सी होने लगती है यादों से

इक खिलौना जोगी से खो गया था बचपन में
ढूँढता फिरा उस को वो नगर नगर तन्हा

मेरा बचपन भी साथ ले आया
गाँव से जब भी आ गया कोई

मिरी मैली हथेली पर तो बचपन से
गरीबी का खरा सोना चमकता है