बदनाम शायरी – Badnam Shayari in Hindi

Badnam Shayari

इश्क़ का ज़ौक़ ए नज़ारा मुफ़्त में बदनाम है
हुस्न ख़ुद बे ताब है जल्वा दिखाने के लिए !

मर्ग ए आशिक़ पे फ़रिश्ता मौत का बदनाम था
वो हँसी रोके हुए बैठा था जिस का काम था !

तुझ को शिकवा है कि उश्शाक़ ने बदनाम किया
सच तो ये है कि तिरा हुस्न है दुश्मन तेरा !

जहाँ में हो गई ना हक़ तिरी जफ़ा बदनाम
कुछ अहल ए शौक़ को दार ओ रसन से प्यार भी है !

किया बदनाम इक आलम ने ग़मगीं पाक बाज़ी में
जो मैं तेरी तरह से बद नज़र होता तो क्या होता !

फ़रिश्ते को मिरे नाले यूँही बदनाम करते हैं
मिरे आमाल लिखती हैं मिरी क़िस्मत की तहरीरें !

उसी के ज़िक्र से हम शहर में हुए बदनाम
वो एक शख़्स कि जिस से हमारी बोल न चाल !

मत करो शम्अ कूँ बदनाम जलाती वो नहीं
आप सीं शौक़ पतंगों को है जल जाने का !

मशहूर भी हैं बदनाम भी हैं ख़ुशियों के नए पैग़ाम भी हैं
कुछ ग़म के बड़े इनआम भी हैं पढ़िए तो कहानी काम की है !

दिए बुझे तो हवा को किया गया बदनाम
क़ुसूर हम ने किया एहतिसाब उस का था !

जिन की ख़ातिर शहर भी छोड़ा जिन के लिए बदनाम हुए
आज वही हम से बेगाने बेगाने से रहते हैं !

बुत परस्ती में न होगा कोई मुझ सा बदनाम
झेंपता हूँ जो कहीं ज़िक्र ए ख़ुदा होता है !

तू जफ़ाओं से जो बदनाम किए जाता है
याद आएगी तुझे मेरी वफ़ा मेरे बाद !

वैसे तो सभी ने मुझे बदनाम किया है
तू भी कोई इल्ज़ाम लगाने के लिए आ !

हम आह भी करते हैं तो हो जाते हैं बदनाम
वो क़त्ल भी करते हैं तो चर्चा नहीं होता !

एक ज़रा सी भूल पे हम को इतना तू बदनाम न कर
हम ने अपने घाव छुपा कर तेरे काज सँवारे हैं !

सर फोड़ के मर जाएँगे बदनाम करेंगे
जिस काम से डरते हो वही काम करेंगे !

क्या ग़म है जो हम गुमनाम रहे तुम तो न मगर बदनाम हुए
अच्छा है कि मेरे मरने पर दुनिया में मिरा मातम न हुआ !

ख़ैर बदनाम तो पहले भी बहुत थे लेकिन
तुझ से मिलना था कि पर लग गए रुस्वाई को !

मिलें किसी से तो बद नाम हों ज़माने में
अभी गए हैं वो मुझ को सुना के पर्दे में !