Barsaat Shayari बरसात शायरी हिंदी में (2022-23)

Barsaat Shayari In Hindi | बरसात शायरी हिंदी में

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Barsaat Shayari
एक दिन भीगे थे बरसात में हम तुम दोनों
अब जो बरसात में भीगोगे तो याद आऊँगा

हम तो समझे थे कि बरसात में बरसेगी शराब
आई बरसात तो बरसात ने दिल तोड़ दिया

तालाब तो बरसात में हो जाते हैं कम जर्फ
बाहर कभी आपे से समुंदर नहीं होता

दिल में असगर के खुशियों की बरसात थी
हँसते हँसते वो क्यूँ गम जदा हो गया

बरसात का बादल तो दीवाना है क्या जाने
किस राह से बचना है किस छत को भिगोना है

कोई मंजर नहीं बरसात के मौसम में भी
उस की जुल्फों से फिसलती हुई धूपों जैसा

दो बादल आपस में मिले थे फिर ऐसी बरसात हुई
जिस्म ने जिस्म से सरगोशी की रूह की रूह से बात हुई

सर्दी भी खत्म हो गई बरसात भी गई
और इस के साथ गर्मी ए जज्बात भी गई

फिर लाई है बरसात तिरी याद का मौसम
गुलशन में नया फूल खिला देख रहा हूँ

वो जिन आँखों में थी बरसात के मंजर की झलक
अब उन आँखों में सफेदी न सियाही न धनक

रुकी रुकी सी है बरसात खुश्क है सावन
ये और बात कि मौसम यही नुमू का है

दिल की खेती सूख रही है कैसी ये बरसात हुई
ख्वाबों के बादल आते हैं लेकिन आग बरसती है

आह ये बरसात का मौसम ये जख्मों की बहार
हो गया है खून ए दिल आँखों से जारी इन दिनों

बरसात थम चुकी है मगर हर शजर के पास
इतना तो है कि आप का दामन भिगो सके

बरसात के आते ही तौबा न रही बाकी
बादल जो नजर आए बदली मेरी नीयत भी

हम ने बरसात के मौसम में जो चाही तौबा
अब्र इस जोर से गरजा कि इलाही तौबा

अब भी बरसात की रातों में बदन टूटता है
जाग उठती हैं अजब ख्वाहिशें अंगड़ाई की

बता ऐ अब्र मुसावात क्यूँ नहीं करता
हमारे गाँव में बरसात क्यूँ नहीं करता

दुआ ही वज्ह ए करामात थोड़ी होती है
गजब की धूप में बरसात थोड़ी होती है