Bebasi Shayari बेबसी शायरी हिंदी में (2022-23)

Bebasi Shayari In Hindi | बेबसी शायरी हिंदी में

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Bebasi Shayari
तीरगी खामुशी बेबसी तिश्नगी
हिज्र की रात में खामियाँ खामियाँ

सुकूत ए शहर ए दिल की बेबसी को भी कोई समझे
खामुशी बोलती है तो भला क्या क्या नहीं कहती

जब आया ईद का दिन घर में बेबसी की तरह
तो मेरे फूल से बच्चों ने मुझ को घेर लिया

न पूछो बेबसी उस तिश्ना लब की
कि जिस की दस्तरस में जाम भी है

हमारी बेबसी शहरों की दीवारों पे चिपकी है
हमें ढूँडेगी कल दुनिया पुराने इश्तिहारों में

आँसुओं से लिख रहे हैं बेबसी की दास्ताँ
लग रहा है दर्द की तस्वीर बन जाएँगे हम

ये अपनी बेबसी है या कि अपनी बे हिसी यारो
है अपना हाथ उन के सामने जो खुद भिकारी हैं

बेबसी से नजात मिल जाए
फिर सवाल ओ जवाब कर लेना

किस बेबसी के साथ बसर कर रहा है उम्र
इंसान मुश्त ए खाक का एहसास लिए हुए

भँवर जब भी किसी मजबूर कश्ती को डुबोता है
तो अपनी बेबसी पर दूर से साहिल तड़पता है

मैं बोलता हूँ तो इल्जाम है बगावत का
मैं चुप रहूँ तो बड़ी बेबसी सी होती है

हदीस ए दिल ब जबान ए नजर भी कह न सका
हुजूर ए हुस्न बढ़ी और बेबसी मेरी

हैं कहकहे किसी के किसी की हैं सिसकियाँ
शामिल रहा खुशी में किसी बेबसी का शोर

क्या शक्ल है वस्ल में किसी की
तस्वीर हैं अपनी बेबसी की

कह तो सकता हूँ मगर मजबूर कर सकता नहीं
इख्तियार अपनी जगह है बेबसी अपनी जगह

सुना है लोग वहाँ मुझ से खार खाते हैं
फसाना आम जहाँ मेरी बेबसी का है

वो जो आँसुओं की जबान थी मुझे पी गई
वो जो बेबसी के कलाम थे मुझे खा गए

वो मिरे बस को कैसे समझेगा
जो मिरी बेबसी को समझा नहीं

एक मुश्त ए खाक और वो भी हवा की जद में है
जिंदगी की बेबसी का इस्तिआरा देखना

उन के सितम भी कह नहीं सकते किसी से हम
घुट घुट के मर रहे हैं अजब बेबसी से हम

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