Bewakoof Shayari बेवकूफ शायरी हिंदी में (2022-23)

Bewakoof Shayari In Hindi | बेवकूफ़ शायरी हिंदी में

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Bewakoof Shayari
अहमक कुमकुमो! बेवकूफ मशीनो!
तुम सब शायद सोचते होगे

होश में जो बेवकूफ आते नहीं
अक्ल को जो काम में लाते नहीं

वबा के दिनों में
दरबारों में झाड़ू देती
बेवकूफ बुढ़िया

कम समझ और बेवकूफ था वो
समझा कोई कुएँ में है बैठा

खुदा या ये लोग कितने बेवकूफ हैं
मुझे जिंदगी का कोई तजरबा नहीं

ऐ हम नफसाँ
बे वक्फा ए ख्वाब
सिगनल की बत्ती जलती बुझती सदा

कागज की नाव
का नक्श ए गुरेजाँ जाना पहचाना सा कागज जाने पहचाने हुरूफ
नन्हा बोला आज जो ताली न पीटे बेवकूफ

फिरा कर दर ब दर चुनवाए तिनके रात दिन उन से
बनाया बेवकूफ अच्छा जुनून ए फित्ना सामाँ ने

शौक बहराइची
जो भी शरीक ए महफिलए ए रिंदाँ न हो सका
वो बेवकूफ कामिल ए ईमाँ न हो सका

शो ला से दूर रहिए कि शाइ र सही मगर
जिद्दी है बेवकूफ है दिल का बुरा भी है

द्वारका दास शोला
दुश्मन की चापलूसी से कुछ फाएदा नहीं
साले को बेवकूफ बनाए हुए तो हूँ

बूम मेरठी
ओ नंग ए ए तिबार दुआ पर न रख मदार
ओ बेवकूफ हिम्मत ए मर्दाना चाहिए

ये गधा जो अपनी गफ्लत से है बेवकूफ इतना
जो ये खुद को जान जाता बड़ा होशियार होता

मय कदा क्यूँ है किबला ए हाजात
वो मुझे बेवकूफ कहते हैं

ये बेवकूफ उन्हें मौत से डराते हैं
जो खुद ही साया ए खंजर में जा के लेट गए

सूरज से जंग जीतने निकले थे बेवकूफ
सारे सिपाही मोम के थे घुल के आ गए

ये बेवकूफ बहुत लगती है अवाम उसे
तभी तो रोज ही जुमले नवीन कहता है

तन्हाइयों पे अपनी नजर कर जरा कभी
ऐ बेवकूफ दिल तुझे घबराना चाहिए

क्या वो है बेवकूफ कि जो बोलता है सच
इस बात को समझना पड़ा सोचना पड़ा

उस बे हया से काहे को खाली करो हो मग्ज
ये बेवकूफ है जो कहे आन ये सुखन

वो बज्म ए शौक में शामिल कभी नहीं होगा
जो बेवकूफ कि उलझा हुआ हिसाब में है

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