Burai Shayari बुराई शायरी हिंदी में (2022-23)

Burai Shayari In Hindi | बुराई शायरी हिंदी में

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Burai Shayari बुराई शायरी हिंदी में (2022-23) In Hindi

Burai Shayari
मोहसिन बुरे दिनों में नया दोस्त कौन हो
है जिस का पहला कर्ज उसी से सवाल कर

जमाना है बुरे हम साए जैसा
सो हम साए से झगड़ा कर चुके हैं

बुरे भले में फर्क है ये जानते हैं सब मगर
है कौन नेक कौन बद नजर नजर की बात है

Burai Shayari बुराई शायरी हिंदी में (2022-23) हिंदी में

एहसान अपना कोई बुरे वक्त का नहीं
अहबाब बेवफा हैं खुदा बे नियाज है

Burai Shayari बुराई शायरी हिंदी में (2022-23) 2 line

जितने अच्छे हैं मैं हूँ उन में बुरा
हैं बुरे जितने उन में अच्छा हूँ

अच्छे बुरे को वो अभी पहचानते नहीं
कमसिन हैं भोले भाले हैं कुछ जानते नहीं

बुरा बुरे के अलावा भला भी होता है
हर आदमी में कोई दूसरा भी होता है

वाए किस्मत वो भी कहते हैं बुरा
हम बुरे सब से हुए जिन के लिए

वो कह रहा था बुराई बुराई जन्ती है
सो उस के वास्ते ले कर कँवल गया हूँ मैं

औरों की बुराई को न देखूँ वो नजर दे
हाँ अपनी बुराई को परखने का हुनर दे

शैख जी बुत की बुराई कीजे
अपने अल्लाह से भरपाइगा

मेरे माहौल में हर सम्त बुरे लोग नहीं
कुछ भले भी मिरे हमराह चले आते हैं

तदबीर से किस्मत की बुराई नहीं जाती
बिगड़ी हुई तकदीर बनाई नहीं जाती

हम वो नहीं सुनें जो बुराई हुजूर की
ये आप थे जो गैर की बातों में आ गए

एक हम हैं कि जहाँ जाएँ बुरे कहलाएँ
एक वो हैं कि जहाँ जाएँ वहीं अच्छे हैं

वो बुराई सब से मेरी कर रहे हैं
क्यूँ नहीं करते बयाँ अच्छाइयों को

न लगती आँख तो सोने में क्या बुराई थी
खबर कुछ आप की होती तो बे खबर होता

इस बार मिली है जो नतीजे में बुराई
काम आई है अपनी कोई अच्छाई हमारे

बुरा लगा मिरे साकी को जिक्र ए तिश्ना लबी
कि ये सवाल मिरी बज्म में कहाँ से उठा

बुराई भलाई की सूरत हुई
मोहब्बत में सब कुछ रवा हो गया

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