चले शायरी – Chale Shayari in Hindi

Chale Shayari

सहर के साथ चले रौशनी के साथ चले
तमाम उम्र किसी अजनबी के साथ चले !

तोहमत ए चंद अपने ज़िम्मे धर चले
जिस लिए आए थे हम कर चले !

लाई हयात आए क़ज़ा ले चली चले
अपनी ख़ुशी न आए न अपनी ख़ुशी चले !

सू ए कलकत्ता जो हम ब दिल ए दीवाना चले
गुनगुनाते हुए इक शोख़ का अफ़्साना चले !

जला के मिशअल ए जाँ हम जुनूँ सिफ़ात चले
जो घर को आग लगाए हमारे साथ चले !

गुलों में रंग भरे बाद ए नौ बहार चले
चले भी आओ कि गुलशन का कारोबार चले !

गुज़रे जिधर से नूर बिखेरे चले गए
वो हम सफ़र हुए तो अँधेरे चले गए !

क़द ओ गेसू लब ओ रुख़्सार के अफ़्साने चले
आज महफ़िल में तिरे नाम पे पैमाने चले !

रुके रुके से क़दम रुक के बार बार चले
क़रार दे के तिरे दर से बे क़रार चले !

कश्ती है घाट पर तू चले क्यूँ न दूर आज
कल बस चले चले न चले चल उठा तो ला !

मय कशो देर है क्या दौर चले बिस्मिल्लाह
आई है शीशा ओ साग़र की तलबगार घटा !

इक दश्त ए बे अमाँ का सफ़र है चले चलो
रुकने में जान ओ दिल का ज़रर है चले चलो !

ले क़ज़ा एहसान तुझ पर कर चले
हम तिरे आने से पहले मर चले !

वहीं बहार ब कफ़ क़ाफ़िले लपक के चले
जहाँ जहाँ तिरे नक़्श ए क़दम उभरते रहे !

दिन गुज़रते हैं गुज़रते ही चले जाते हैं
एक लम्हा जो किसी तरह गुज़रता ही नहीं !

तुम्हारी बज़्म की यूँ आबरू बढ़ा के चले
पिए बग़ैर ही हम पाँव लड़खड़ा के चले !

ऐ नूह खुल चले थे वो हम से शब ए विसाल
इतने में आफ़्ताब नुमूदार हो गया !

फ़र्श ए मय ख़ाना पे जलते चले जाते हैं चराग़
दीदनी है तिरी आहिस्ता रवी ऐ साक़ी !

सब्र ओ क़रार ए दिल मिरे जाने कहाँ चले गए
बिछड़े हुए न फिर मिले ऐसे हुए जुदा कि बस !

मिट चले मेरी उमीदों की तरह हर्फ़ मगर
आज तक तेरे ख़तों से तिरी ख़ुशबू न गई !