Dada Shayari दादा शायरी हिंदी में (2022-23)

Dada Shayari In Hindi | दादा शायरी हिंदी में

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Dada Shayari
शमशीर साफ यार जो जहराब दादा हो
वो खत सब्ज है कि ब रुख्सार सादा हो

वक्त ए रुख्सत आब दीदा आप क्यूँ हैं
जिस्म से तो जाँ हमारी जा रही है

आब दीदा हूँ मैं खुद जख्म ए जिगर से अपने
तेरी आँखों में छुपा दर्द कहाँ से देखूँ

ऐ नूर ए जान ओ दीदा तिरे इंतिजार में
मुद्दत हुई पलक सूँ पलक आश्ना नईं

कपड़े गले के मेरे न हों आब दीदा क्यूँ
मानिंद ए अब्र दीदा ए तर अब तो छा गया

क्यूँ खिलौने टूटने पर आब दीदा हो गए
अब तुम्हें हम क्या बताएँ क्या परेशानी हुई

हाथों से दिल ओ दीदा के आया हूँ निपट तंग
आँखों को रोऊँ या मैं करूँ सरजनिश ए दिल

ये आब दीदा ठहर जाए झील की सूरत
कि एक चाँद का टुकड़ा नहाना चाहता है

जोखम ऐ मर्दुम ए दीदा है समझ के रोना
डूब भी जाते हैं दरिया में नहाने वाले

अव्वल अव्वल खूब दौड़ी कश्ती ए अहल ए हवस
आखिर आखिर डूब मरने का मकाम आ ही गया

है नूर ए बसर मर्दुमक ए दीदा में पिन्हाँ यूँ जैसे कन्हैया
सो अश्क के कतरों से पड़ा खेले है झुरमुट और आँखों में पनघट

छोड़ा नहीं खुदी को दौड़े खुदा के पीछे
आसाँ को छोड़ बंदे मुश्किल को ढूँडते हैं

सख्ती अय्याम दौड़े आती है पत्थर लिए
क्या मिरा नख्ल ए तमन्ना बारवर होने लगा

नमली और न दूदी है न मंशारी है
नब्ज ए बीमार ए मोहब्बत की है रफ्तार जुदा

मेरे आने की खबर सुन के वो दौड़ा आता
उस को पहुँचा नहीं पैगाम यही लगता है

कौन उठ गया है पास से मेरे जो मुसहफी
रोता हूँ जार जार पड़ा आब दीदा हूँ

सैलाब ए चश्म ए तर से जमाना खराब है
शिकवे कहाँ कहाँ हैं मिरे आब दीदा के

तूफाँ उठा रहा है मिरे दिल में सैल ए अश्क
वो दिन खुदा न लाए जो मैं आब दीदा हूँ

मुझ मस्त को क्यूँ भाए न वो साँवली सूरत
जी दौड़े है मय कश का गिजा ए नमकीं पर

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