Deepak Shayari दीपक शायरी हिंदी में (2022-23)

Deepak Shayari In Hindi | दीपक शायरी हिंदी में

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Deepak Shayari
उस गैरत ए नाहीद की हर तान है दीपक
शोला सा लपक जाए है आवाज तो देखो

फिर मिरी याद आ रही होगी
फिर वो दीपक बुझा रही होगी

एक उम्र भर में तय ये सफर मुख्तसर हुआ
शहर ए खमोशाँ घर से बहुत दूर तो न था

यूँ गुफ्तुगू ए उल्फत दिलचस्प हम करेंगे
आँखों से तुम कहोगे आँखों से हम सुनेंगे

तो बच रहेगा यकीनन ये सिर्फ आँखों में
बचाया तुम ने न पानी जो वक्त के रहते

था कभी उन की निगाहों में बुलंद अपना मकाम
इतनी ऊँचाई से गिर कर भी कोई बचता है

खूब रू कौन ये आया चमन में आज कि याँ
शर्म से सुर्ख हुए जाते हैं ये फूल सभी

अजल से बरसे है पाकीजगी फलक से यहाँ
नुमायाँ होवे है फिर शक्ल ए बहन में वो यहाँ

कि है मुख्तसर दास्ताँ इश्क की
गले मिल के कोई गले पड़ गया

जब आना ख्वाब में हौले से नर्मी से कदम रखना
गराँ है इक जरा आहट तिरे महव ए तसव्वुर को

है खूब मंजर ए चारागरी कि हम ने यहाँ
दुआ के दर पे है देखा दवा को सज्दे में

कहाँ जुरअत इन अश्कों की कि देहरी आँख की लाँघें
है पहरा जब्त का ऐसा कि सहमे सहमे रहते हैं

वतन परस्ती हमारा मजहब हैं जिस्म ओ जाँ मुल्क की अमानत
करेंगे बरपा कहर अदू पर रहेगा दाइम वतन सलामत

हवस ए जर ने किया रिश्तों का जो हाल न पूछ
खूँ रुलाता है यहाँ खून का रिश्ता अपना

सियह बख्ती का साया दीदा ओ दिल पर है यूँ तारी
कि इक मुद्दत से मेरे दिन भी कजलाए हुए से हैं

अच्छा हुआ जबान ए खमोशी न तुम पढ़े
शिकवे मिरे वगर्ना रुलाते तुम्हें बहुत

लम्हात ए वस्ल याद जो आए शब ए फिराक
यक लख्त सुर्ख हो गए आरिज बे इख्तियार

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