दीवानगी शायरी | Deewangi Shayari

Deewangi Shayari दीवानगी शायरी

Deewangi Shayari In Hindi | दीवानगी शायरी हिंदी में

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Deewangi Shayari

ऐन दानाई है नासिख इश्क में दीवानगी
आप सौदाई हैं जो कहते हैं सौदाई मुझे

दीवानगी मेरी के तहय्युर में शब ओ रोज
है हल्का ए जंजीर से जिंदाँ हमा तन चश्म

मिरी दीवानगी पर होश वाले बहस फरमाएँ
मगर पहले उन्हें दीवाना बनने की जरूरत है

हुई दीवानगी इस दर्जा मशहूर ए जहाँ मेरी
जहाँ दो आदमी भी हैं छिड़ी है दास्ताँ मेरी

तुम्हारी जात से मंसूब है दीवानगी मेरी
तुम्हीं से अब मिरी दीवानगी देखी नहीं जाती

इस तरह तो और भी दीवानगी बढ़ जाएगी
पागलों को पागलों से दूर रहना चाहिए

पहना जो मैं ने जामा ए दीवानगी तो इश्क
बोला कि ये बदन पे तिरे सज गया लिबास

दीवानगी के सिलसिला का होए जो मुरीद
उस गेसू ए दराज सिवा पीर ही नहीं

कब का गुजर चुका है दीवानगी का आलम
फिर भी मजाज अपना दामन रफू करे है

तमाम उम्र की दीवानगी के ब अद खुला
मैं तेरी जात में पिन्हाँ था और तू मैं था

कभी खिरद कभी दीवानगी ने लूट लिया
तरह तरह से हमें जिंदगी ने लूट लिया

दीवानगी में फेंक रहे थे जो हम लिबास
उतरी कबा बुखार बदन से उतर गया

चलो अच्छा हुआ काम आ गई दीवानगी अपनी
वगरना हम जमाने भर को समझाने कहाँ जाते

खुली न मुझ पे भी दीवानगी मिरी बरसों
मिरे जुनून की शोहरत तिरे बयाँ से हुई

गैर कहते हैं कि हम बैठने देवेंगे न याँ
अब तो इस जिद से जो कुछ होवे सो हो बैठे हम

कर गई दीवानगी हम को बरी हर जुर्म से
चाक दामानी से अपनी पाक दामानी हुई

दीवानगी की ऐसी मिलेगी कहाँ मिसाल
काँटे खरीदता हूँ गुलाबों के शहर में

तारीख ए काएनात ए इबादत जुनूँ से है
उन्वान ए अक्ल ओ होश है दीवानगी की बात

उन को हँसा रही है जामा दरी हमारी
परवान चढ़ रही है दीवानगी हमारी

नई मुश्किल कोई दरपेश हर मुश्किल से आगे है
सफर दीवानगी का इश्क की मंजिल से आगे है

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