Dharti Shayari धरती शायरी हिंदी में (2022-23)

Dharti Shayari In Hindi | धरती शायरी हिंदी में

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Dharti Shayari
हम उस धरती के बाशिंदे थे ताबिश
कि जिस का कोई मुस्तकबिल नहीं था

नमी उतर गई धरती में तह ब तह असलम
बहार ए अश्क नई रुत की इब्तिदा में है

हम अपनी धरती से अपनी हर सम्त खुद तलाशें
हमारी खातिर कोई सितारा नहीं चलेगा

वो भी धरती पे उतारी हुई मख्लूक ही है
जिस का काटा हुआ इंसान न पानी माँगे

धरती और अम्बर पर दोनों क्या रानाई बाँट रहे थे
फूल खिला था तन्हा तन्हा चाँद उगा था तन्हा तन्हा

क्या जाने कब धरती पर सैलाब का मंजर हो जाए
हर दम ये मजबूर निगाहें वर्षा करती रहती हैं

कभी बे दाम ठहरावें कभी जंजीर करते हैं
ये ना शाएर तिरी जुल्फाँ कूँ क्या क्या नाम धरते हैं

जो छू लूँ आसमाँ पाँव की धरती खींच लेता है
वो मुझ को क्यूँ मिरे कद से बड़ा होने नहीं देता

रोज दोहराते थे अफ्साना ए दिल
किस तरह भूल गया याद नहीं

झूट है सब तारीख हमेशा अपने को दुहराती है
अच्छा मेरा ख्वाब ए जवानी थोड़ा सा दोहराए तो

रोज बस्ते हैं कई शहर नए
रोज धरती में समा जाते हैं

हाए वो बातें जो कह सकते नहीं
और तन्हाई में दोहराते हैं हम

अपना आप पड़ा रह जाता है बस इक अंदाजे पर
आधे हम इस धरती पर हैं आधे उस सय्यारे पर

कोई जारी सुनी नहीं जाती कोई जुर्म मुआफ नहीं होता
इस धरती पर इस छत के तले कोई तेरे खिलाफ नहीं होता

कोई दीवाना कहता है कोई पागल समझता है
मगर धरती की बेचैनी को बस बादल समझता है

बलवाइयों ने रंग जमाया था हर तरफ
धरती थी सुर्ख सुर्ख और अम्बर लहू लहू

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