दीवाना शायरी | Diwana Shayari

Diwana Shayari दीवाना शायरी

Diwana Shayari In Hindi | दीवाना शायरी हिंदी में

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Diwana Shayari

कोई दाना कोई दीवाना मिला
शहर में हर शख्स बेगाना मिला

तेरा दीवाना तो वहशत की भी हद से निकला
कि बयाबाँ को भी चाहे है बयाबाँ होना

कोई दीवाना चाहे भी तो लग्जिश कर नहीं सकता
तिरे कूचे में पाँव लड़खड़ाना भूल जाते हैं

एक था शख्स जमाना था कि दीवाना बना
एक अफ्साना था अफ्साने से अफ्साना बना

मैं यूँ तलाश ए यार में दीवाना हो गया
काबे में पाँव रक्खा तो बुत खाना हो गया

अगर दुनिया तुझे दीवाना कहती है तो कहने दे
वफादारान ए उल्फत पर यही इल्जाम आता है

कुछ कह के उस ने फिर मुझे दीवाना कर दिया
इतनी सी बात थी जिसे अफ्साना कर दिया

मैं दीवाना हूँ और दैर ओ हरम से मुझ को वहशत है
पड़ी रहने दो मेरे पाँव में जंजीर ए मय खाना

या तो दीवाना हँसे या तुम जिसे तौफीक दो
वर्ना इस दुनिया में रह कर मुस्कुराता कौन है

बस यही होगा कि दीवाना कहेंगे अहल ए बज्म
आप चुप क्यूँ हैं मिरी तर्ज ए नवा ले लीजिए

दीवाना हूँ पर काम में होशियार हूँ अपने
यूसुफ का खयाल आया जो जिंदाँ नजर आया

मैं हूँ तो दिवाना प किसी जुल्फ का नहीं हूँ
वल्लाह कि रखता नहीं यक तार किसी का

उधर सच बोलने घर से कोई दीवाना निकलेगा
उधर मक्तल में इस्तिकबाल की तय्यारियाँ होंगी

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