दुआ शायरी | Duaa Shayari

Duaa Shayari

उस दुश्मन ए वफ़ा को दुआ दे रहा हूँ मैं
मेरा न हो सका वो किसी का तो हो गया !

ख़ुदा! सिला दे दुआ का, मोहब्बतों के ख़ुदा
ख़ुदा! किसी ने किसी के लिए दुआ की थी !

मंज़र को किसी तरह बदलने की दुआ दे
दे रात की ठंडक को पिघलने की दुआ दे !

कोई दवा न दे सके मशवरा ए दुआ दिया
चारागरों ने और भी दर्द दिल का बढ़ा दिया !

जब लगें ज़ख़्म तो क़ातिल को दुआ दी जाए
है यही रस्म तो ये रस्म उठा दी जाए !

है दुआ याद मगर हर्फ़ ए दुआ याद नहीं
मेरे नग़्मात को अंदाज़ ए नवा याद नहीं !

महव यूँ हो गए अल्फ़ाज़ ए दुआ वक़्त ए दुआ
हाथ से ज़र्फ़ ए तलब छूट गया हो जैसे !

होती नहीं क़ुबूल दुआ तर्क ए इश्क़ की
दिल चाहता न हो तो ज़बाँ में असर कहाँ !

मुझे ज़िंदगी की दुआ देने वाले
हँसी आ रही है तिरी सादगी पर !

मेरे हम नफ़स मेरे हम नवा मुझे दोस्त बन के दग़ा न दे
मैं हूँ दर्द ए इश्क़ से जाँ ब लब मुझे ज़िंदगी की दुआ न दे !

क्या दुआ रोज़ ए हश्र की माँगें
वहाँ पर भी यही ख़ुदा होगा !

मौला से मग़्फ़िरत के अलावा दुआ में शाद
कुछ और माँगने की जसारत कभी न की !

जवानी की दुआ लड़कों को ना हक़ लोग देते हैं
यही लड़के मिटाते हैं जवानी को जवाँ हो कर !

यही दुआ है वो मेरी दुआ नहीं सुनता
ख़ुदा जो होता अगर क्या ख़ुदा नहीं सुनता !

हर दम यही दुआ है ख़ुदा की जनाब में
आ जाए यार ख़ुद मिरे ख़त के जवाब में !

मैं नज़र से पी रहा था तो ये दिल ने बद दुआ दी
तिरा हाथ ज़िंदगी भर कभी जाम तक न पहुँचे !

दुआ करो कि मैं उस के लिए दुआ हो जाऊँ
वो एक शख़्स जो दिल को दुआ सा लगता है !

देख कर तूल ए शब ए हिज्र दुआ करता हूँ
वस्ल के रोज़ से भी उम्र मिरी कम हो जाए !

हर दम ये दुआ माँगते रहते हैं ख़ुदा से
अल्लाह बचाए शब ए फ़ुर्क़त की बला से !

बे नवा हैं कि तुझे सौ ओ नवा भी दी है
जिस ने दिल तोड़ दिए उस की दुआ भी दी है !