Dukh Shayari दुख शायरी हिंदी में (2022-23)

Dukh Shayari In Hindi | दुख शायरी हिंदी में

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Dukh Shayari

दुख दे या रुस्वाई दे
गम को मिरे गहराई दे

अपने दुख में रोना धोना आप ही आया
गैर के दुख में खुद को दुखाना इश्क में सीखा

तेरे दुख को पा कर हम तो अपना दुख भी भूल गए
किस को खबर थी तेरी खमोशी तह दर तह इक तूफाँ है

तेरे दिए हुए दुख
तेरे नाम करेंगे

बासिर सुल्तान काजमी

दुख के ताक पे शाम ढले
किस ने दिया जलाया था

दर्द हो दुख हो तो दवा कीजे
फट पड़े आसमाँ तो क्या कीजे

कुछ उम्र अपनी जात का दुख झेलते रहे
कुछ उम्र काएनात का दुख झेलना पड़ा

कैसे दुख कितनी चाह से देखा
तुझे किस किस निगाह से देखा

किनारों से जुदा होता नहीं तुग्यानियों का दुख
नई मौजों में रहता है पुराने पानियों का दुख

जब्त लाजिम है मगर दुख है कयामत का फराज
जालिम अब के भी न रोएगा तो मर जाएगा

सुनती रही मैं सब के दुख खामोशी से
किस का दुख था मेरे जैसा भूल गई

रातें ऐश ओ इशरत की दिन दुख दर्द मुसीबत के
आती आती आती हैं जाते जाते जाते हैं

मोहब्बत एक दम दुख का मुदावा कर नहीं देती
ये तितली बैठती है जख्म पर आहिस्ता आहिस्ता

गो तर्क ए तअल्लुक में भी शामिल हैं कई दुख
बे कैफ तअल्लुक के भी आजार बहुत हैं

इक दिन दुख की शिद्दत कम पड़ जाती है
कैसी भी हो वहशत कम पड़ जाती है

दुख उदासी मलाल गम के सिवा
और भी है कोई मकान में क्या

मैं शायद तेरे दुख में मर गया हूँ
कि अब सीने में कुछ दुखता नहीं है

कितनी बे सूद जुदाई है कि दुख भी न मिला
कोई धोका ही वो देता कि मैं पछता सकता

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