दुश्मनी शायरी | Dushmani Shayari

Dushmani Shayari दुश्मनी शायरी

Dushmani Shayari In Hindi | दुश्मनी शायरी हिंदी में

Dushmani Shayari In Hindi (दुश्मनी शायरी हिंदी में) सम्बंधित हर शायरी पोस्ट के अन्दर है.Dushmani Shayari In Hindi | दुश्मनी शायरी हिंदी में Dushmani Shayari In Hindi (दुश्मनी शायरी हिंदी में) सम्बंधित हर शायरी पोस्ट के अन्दर है.

Dushmani Shayari
दुश्मनी का सफर इक कदम दो कदम
तुम भी थक जाओगे हम भी थक जाएँगे

दुश्मनों ने जो दुश्मनी की है
दोस्तों ने भी क्या कमी की है

दोस्तों से दुश्मनी और दुश्मनों से दोस्ती
बे मुरव्वत बेवफा बे रहम ये क्या ढंग है

फकीह ए शहर से कुछ खास दुश्मनी तो नहीं
फकीह ए शहर से लेकिन ठनी सी रहती है

दुश्मनों की दुश्मनी मेरे लिए आसान थी
खर्च आया दोस्तों की मेजबानी में बहुत

वफा पर दगा सुल्ह में दुश्मनी है
भलाई का हरगिज जमाना नहीं है

वो दुश्मनी से देखते हैं देखते तो हैं
मैं शाद हूँ कि हूँ तो किसी की निगाह में

हजार बार हवाओं से दुश्मनी होगी
बस एक बार चरागों से दोस्ती के लिए

ये दुश्मनी है साकी या दोस्ती है साकी
औरों को जाम देना मुझ को दिखा दिखा के

पुराने अहद में भी दुश्मनी थी
मगर माहौल जहरीला नहीं था

दुश्मनी लाख सही खत्म न कीजे रिश्ता
दिल मिले या न मिले हाथ मिलाते रहिए

राजी हैं हम कि दोस्त से हो दुश्मनी मगर
दुश्मन को हम से दोस्त बनाया न जाएगा

दुश्मनी पेड़ पर नहीं उगती
ये समर दोस्ती से मिलता है

क्या लुत्फ ए दोस्ती कि नहीं लुत्फ ए दुश्मनी
दुश्मन को भी जो देखिए पूरा कहाँ है अब

मुझे जो दोस्ती है उस को दुश्मनी मुझ से
न इख्तियार है उस का न मेरा चारा है

क्या रूप दोस्ती का क्या रंग दुश्मनी का
कोई नहीं जहाँ में कोई नहीं किसी का

लोग डरते हैं दुश्मनी से तिरी
हम तिरी दोस्ती से डरते हैं

दुश्मनी ने सुना न होवेगा
जो हमें दोस्ती ने दिखलाया

दुश्मनी जम कर करो लेकिन ये गुंजाइश रहे
जब कभी हम दोस्त हो जाएँ तो शर्मिंदा न हों

हुस्न को क्या दुश्मनी है इश्क को क्या बैर है
अपने ही कदमों की खुद ही ठोकरें खाता हूँ मैं

Read More :True Love Quotes
Read More :Tree Shayari
Read More :Travel Shayari