Fauji Shayari (2022-23)

Fauji Shayari In Hindi | फौजी शायरी हिंदी में

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Fauji Shayari
पुकारा कासिद ए अश्क आज फौज ए गम के हाथों से
हुआ ताराज पहले शहर ए जाँ दिल का नगर पीछे

किश्त ए दिल फौज ए गम ने की ताराज
तिस पे तू माँगने खिराज आया

जब सीं लाया इश्क ने फौज ए जुनूँ
अक्ल के लश्कर में भागा भाग है

सितम तो ये है कि फौज ए सितम में भी अंजुम
बस अपने लोग ही देखूँ जिधर निगाह करूँ

नहीं इस खुली फजा में कोई गोशा ए फरागत
ये जहाँ अजब जहाँ है न कफस न आशियाना

फजा का तंग होना फितरत ए आजाद से पूछो
पर ए पर्वाज ही क्या जो कफस को आशियाँ समझे

वीरान तो नहीं शब ए तारीक की फजा
हर सू हवा ए बादा से कुछ रौशनी तो है

फजा ये अम्न ओ अमाँ की सदा रखें काएम
सुनो ये फर्ज तुम्हारा भी है हमारा भी

कुछ ऐसी बे यकीनी थी फजा में
जो अपने थे वो बेगाने लगे हैं

हर एक शाख थी लर्जां फजा में चीख ओ पुकार
हवा के हाथ में इक आब दार खंजर था

फैला फजा में नग्मा ए जंजीर ए मर्हबा
जिंदाँ में घुट के रह न सकी जिंदगी की बात

दहशत खुली फजा की कयामत से कम न थी
गिरते हुए मकानों में आ बैठे यार लोग

देख कभी आ कर ये ला महदूद फजा
तू भी मेरी तन्हाई में शामिल हो

मिरे फिक्र ओ फन को नई फजा नए बाल ओ पर की तलाश है
जो कफस को यास के फूँक दे मुझे उस शरर की तलाश है

याद ने उन तंग कूचों की फजा सहरा की देख
हर कदम पर जान मारी है दिल ए नाकाम की

अजब इक बे यकीनी की फजा है
यहाँ होना न होना एक सा है

अहद ए शबाब ए रफ्ता क्या अहद ए पुर फजा था
जीने का भी मजा था मरने का भी मजा था

फजा में तैरते रहते हैं नक्श से क्या क्या
मुझे तलाश न करती हों ये बलाएँ कहीं

हम को जन्नत की फजा से भी जियादा है अजीज
यही बे रंग सी दुनिया यही बे मेहर से लोग

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