Gaaliyan Shayari (2022-23)

Gaaliyan Shayari In Hindi | गालियां शायरी हिंदी में

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Gaaliyan Shayari

याद ए माजी की पुर असरार हसीं गलियों में
मेरे हमराह अभी घूम रहा है कोई

खफा हो गालियाँ दो चाहे आने दो न आने दो
मैं बोसे लूँगा सोते में मुझे लपका है चोरी का

उस की गलियों में रहे गर्द ए सफर की सूरत
संग ए मंजिल न बने राह का पत्थर न हुए

शहर में गलियों गलियों जिस का चर्चा है
वो अफ्साना तेरा भी है मेरा भी

गालियाँ जख्म ए कुहन को देख कर देती हो क्यूँ
बासी खाने में मिलाते हो तआ म ए ताजा आज

मैं जिन गलियों में पैहम बरसर ए गर्दिश रहा हूँ
मैं उन गलियों में इतना खार पहले कब हुआ था

लगे मुँह भी चिढ़ाने देते देते गालियाँ साहब
जबाँ बिगड़ी तो बिगड़ी थी खबर लीजे दहन बिगड़ा

देता रहा वो गालियाँ और मैं रहा खमोश
फिर यूँ हुआ कि वो मिरे कदमों में गिर गया

साए लरजते रहते हैं शहरों की गलियों में
रहते थे इंसान जहाँ अब दहशत रहती है

गालियाँ दीं उस ने बे गिनती हमें
हम ने बोसे भी तो गिन गिन के लिए

सुनाई जाती हैं दर पर्दा गालियाँ मुझ को
कहूँ जो मैं तो कहे आप से कलाम नहीं

जिलाओ मारो दुरकारो बुला लो गालियाँ दे लो
करो जो चाहो हम किस बात से इकराह रखते हैं

बाजार हैं खामोश तो गलियों पे है सकता
अब शहर में तन्हाई का डर बोल रहा है

शहर की गलियों में गहरी तीरगी गिर्यां रही
रात बादल इस तरह आए कि मैं तो डर गया

रात दिन फिर रहा हूँ गलियों में
मेरा इक शख्स खो गया है यहाँ

फिर जेहन की गलियों में सदा गूँजी है कोई
फिर सोच रहे हैं कहीं आवाज सुनी है

कहाँ भटकती फिरेगी अँधेरी गलियों में
हम इक चराग सर ए कूचा हवा रख आए

शहर की गलियों और सड़कों पर फिरते हैं मायूसी में
काश कोई अनवर से पूछे ऐसे बे घर कितने हैं

दिन भर जो सूरज के डर से गलियों में छुप रहते हैं
शाम आते ही आँखों में वो रंग पुराने आ जाते हैं

वर्ना कोई कब गालियाँ देता है किसी को
ये उस का करम है कि तुझे याद रहा मैं

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