Gareeb Shayari (2022-23)

Gareeb Shayari In Hindi | गरीब शायरी हिंदी में

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Gareeb Shayari
गरीब को हवस ए जिंदगी नहीं होती
बस इतना है कि वो इज्जत से मरना चाहता है

उस पर ही भेजता है वो आफत भी मौत भी
शायद उसे गरीब का बच्चा है ना पसंद

मैं तमाम तारे उठा उठा के गरीब लोगों में बाँट दूँ
वो जो एक रात को आसमाँ का निजाम दे मिरे हाथ में

बिक जाऊँ सस्ते दामों जरूरत के वास्ते
उतरा हुआ गरीब का जेवर नहीं हूँ मैं

अमीर शाल दो शालों में गर्म ए राहत ओ ऐश
गरीब के लिए जाड़ों में जिंदगानी धूप

चमन में कौन है पुरसान ए हाल शबनम का
गरीब रोई तो गुंचों को भी हँसी आई

कहूँ तो किस से कहूँ अपना दर्द ए दिल मैं गरीब
न आश्ना न मुसाहिब न हम नशीं कोई

उठ ऐ नकाब ए यार कि बैठे हैं देर से
कितने गरीब दीदा ए पुर नम लिए हुए

पाँव से लग के खड़ी है ये गरीब उल वतनी
उस को समझाओ कि हम अपने वतन आए हैं

किस तरह दूर हों आलाम ए गरीब उल वतनी
जिंदगी खुद भी गरीब उल वतनी होती है

किसी गरीब को जख्मी करें कि कत्ल करें
निगाह ए नाज पे जुर्माने थोड़ी होते हैं

यूँ रूह थी अदम में मिरी बहर ए तन उदास
गुर्बत में जिस तरह हो गरीब उल वतन उदास

किन मंजिलों लुटे हैं मोहब्बत के काफिले
इंसाँ जमीं पे आज गरीब उल वतन सा है

दफना दिया गया मुझे चाँदी की कब्र में
मैं जिस को चाहती थी वो लड़का गरीब था

पहलू में मेरे दिल को न ऐ दर्द कर तलाश
मुद्दत हुई गरीब वतन से निकल गया

तुझ से हम बज्म हों नसीब कहाँ
तू कहाँ और मैं गरीब कहाँ

उठते हुओं को सब ने सहारा दिया कलीम
गिरते हुए गरीब सँभाले कहाँ गए

याद आई न कभी बे सर ओ सामानी में
देख कर घर को गरीब उल वतनी याद आई

नजर उतारती हैं वक्त वक्त पर मेरी
मिली हैं माओं को बीनाइयाँ अजीब ओ गरीब

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