Gareebi Shayari (2022-23)

Gareebi Shayari In Hindi | गरीबी शायरी हिंदी में

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Gareebi Shayari (2022-23) In Hindi

Gareebi Shayari
मैं अब्र ओ बाद से तूफाँ से सब से डरता हूँ
गरीब ए शहर हूँ कागज के घर में रहता हूँ

गरीब ए शहर तो फाके से मर गया आरिफ
अमीर ए शहर ने हीरे से खुद कुशी कर ली

सैलाब उमँड के शहर की गलियों में आ गए
लेकिन गरीब ए शहर का दामन न तर हुआ

Gareebi Shayari (2022-23) हिंदी में

उड़ाऊँ क्यूँ न गरेबाँ की धज्जियाँ हैहात
वही ये हाथ हैं जिन में किसी का दामन था

Gareebi Shayari (2022-23) 2 line

गरेबाँ हम ने दिखलाया उन्हों ने जुल्फ दिखलाई
हमारा समझे वो मतलब हम उन का मुद्दआ समझे

मैं दस्त ओ गरेबाँ हूँ दम ए बाज पुसीं से
हमदम उसे लाता है तो ला जल्द कहीं से

तुम को आना है तो आ जाओ इसी आलम में
बिगड़े हालात गरीबों के सँवरते हैं कहीं

गरेबाँ चाक है हाथों में जालिम तेरा दामाँ है
कि इस दामन तलक ही मंजिल ए चाक ए गरेबाँ है

जब दिल का जहाज अपना तबाही में पड़े है
ले दौड़ें हैं आँसू वहीं आँखों की गराबें

हैरत नहीं जलें जो गरीबों के झोंपड़े
इस रात पी ए सी का बसेरा है शहर में

हम खुद ही बे लिबास रहे इस खयाल से
वहशत बढ़ी तो सू ए गरेबाँ भी आएगी

मैं अब तो ऐ जुनूँ तिरे हाथों से तंग हूँ
लाऊँ कहाँ से रोज गरेबाँ नए नए

सीना फिगार चाक गरेबाँ कफन ब दोश
आए हैं तेरी बज्म में इस बाँकपन से हम

बिखरी हुई है यूँ मिरी वहशत की दास्ताँ
दामन किधर किधर है गिरेबाँ कहाँ कहाँ

जुनूँ के हाथ से है इन दिनों गरेबाँ तंग
कबा पुकारती है तार तार हम भी हैं

मुद्दत हुई है दस्त ओ गरेबाँ हुए हमें
उम्मीद ना उमीदी खुदा रोजगार में

कुछ हँसी खेल सँभलना गम ए हिज्राँ में नहीं
चाक ए दिल में है मिरे जो कि गरेबाँ में नहीं

हटो काँधे से आँसू पोंछ डालो वो देखो रेल गाड़ी आ रही है
मैं तुम को छोड़ कर हरगिज न जाता गरीबी मुझ को ले कर जा रही है

हाथ रहते हैं कई दिन से गरेबाँ के करीब
भूल जा खुद को कि है मअरिफत ए नफ्स यही

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