Garmi Shayari (2022-23)

Garmi Shayari In Hindi | गर्मी शायरी हिंदी में

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Garmi Shayari (2022-23) In Hindi

Garmi Shayari

आतिश ए दोजख में ये गर्मी कहाँ
सोज ए गम हा ए निहानी और है

कयामत में बड़ी गर्मी पड़ेगी हजरत ए जाहिद
यहीं से बादा ए गुल रंग में दामन को तर कर लो

Garmi Shayari (2022-23) हिंदी में

गर्मी से मुज्तरिब था जमाना जमीन पर
भुन जाता था जो गिरता था दाना जमीन पर

Garmi Shayari (2022-23) 2 line

गर्मी में तेरे कूचा नशीनों के वास्ते
पंखे हैं कुदसियों के परों के बहिश्त में

सर्दी और गर्मी के उज्र नहीं चलते
मौसम देख के साहब इश्क नहीं होता

गर्मी सी ये गर्मी है
माँग रहे हैं लोग पनाह

लगी रहती है अश्कों की झड़ी गर्मी हो सर्दी हो
नहीं रुकती कभी बरसात जब से तुम नहीं आए

पिघलते देख के सूरज की गर्मी
अभी मासूम किरनें रो गई हैं

धूप की गरमी से ईंटें पक गईं फल पक गए
इक हमारा जिस्म था अख्तर जो कच्चा रह गया

गर उस के ओर कोई गर्मी से देखता है
इक आग लग उठे है अपने तो तन बदन में

सारा दिन तपते सूरज की गर्मी में जलते रहे
ठंडी ठंडी हवा फिर चली सो रहो सो रहो

गर्मी लगी तो खुद से अलग हो के सो गए
सर्दी लगी तो खुद को दोबारा पहन लिया

प्यासा मत जला साकी मुझे गर्मी सीं हिज्राँ की
शिताबी ला शराब ए खाम हम ने दिल को भूना है

तू जून की गर्मी से न घबरा कि जहाँ में
ये लू तो हमेशा न रही है न रहेगी

गर्मी बहुत है आज खुला रख मकान को
उस की गली से रात को पुर्वाई आएगी

क्यूँ तिरी थोड़ी सी गर्मी सीं पिघल जावे है जाँ
क्या तू नें समझा है आशिक इस कदर है मोम का

गर्मी ने कुछ आग और भी सीने में लगाई
हर तौर गरज आप से मिलना ही कम अच्छा

गर्म ए सफर है गर्म ए सफर रह मुड़ मुड़ कर मत पीछे देख
एक दो मंजिल साथ चलेगी पटके हुए कदमों की चाप

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