Guftagoo Shayari (2022-23)

Guftagoo Shayari In Hindi | गुफ्तागू शायरी हिंदी में

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Guftagoo Shayari (2022-23) In Hindi

Guftagoo Shayari
हर चंद हो मुशाहिदा ए हक की गुफ्तुगू
बनती नहीं है बादा ओ सागर कहे बगैर

गुफ्तुगू अच्छी लगी जौक ए नजर अच्छा लगा
मुद्दतों के बाद कोई हम सफर अच्छा लगा

कल उस की आँख ने क्या जिंदा गुफ्तुगू की थी
गुमान तक न हुआ वो बिछड़ने वाला है

Guftagoo Shayari (2022-23) हिंदी में

थी जुनूँ आमेज अपनी गुफ्तुगू
बात मतलब की भी लेकिन कह गए

Guftagoo Shayari (2022-23) 2 line

हम फकत तेरी गुफ्तुगू में नहीं
हर सुखन हर जबान में हम हैं

या गुफ्तुगू हो उन लब ओ रुख्सार ओ जुल्फ की
या उन खमोश नजरों के लुत्फ ए सुखन की बात

चुप रह के गुफ्तुगू ही से पड़ता है तफरके
होते हैं दोनो होंट जुदा इक सदा के साथ

गुल ओ गुंचा अस्ल में हैं तिरी गुफ्तुगू की शक्लें
कभी खुल के बात कह दी कभी कर दिया इशारा

कई दिन बा द उस ने गुफ्तुगू की
कई दिन बा द फिर अच्छा हुआ मैं

वादा नहीं पयाम नहीं गुफ्तुगू नहीं
हैरत है ऐ खुदा मुझे क्यूँ इंतिजार है

तुझी से गुफ्तुगू हर दम तिरी ही जुस्तुजू हर दम
मिरी आसानियाँ तुझ से मिरी मुश्किल है तू ही तू

जब अंजुमन तवज्जोह ए सद गुफ्तुगू में हो
मेरी तरफ भी इक निगह ए कम सुखन पड़े

गुफ्तुगू तीर सी लगी दिल में
अब है शायद इलाज सन्नाटा

आपस की गुफ्तुगू में भी कटने लगी जबाँ
अब दोस्तों से तर्क ए मुलाकात चाहिए

गुफ्तुगू देर से जारी है नतीजे के बगैर
इक नई बात निकल आती है हर बात के साथ

इक अर्से बाद हुई खुल के गुफ्तुगू उस से
इक अर्से बाद वो काँटा चुभा हुआ निकला

गुफ्तुगू कर के परेशाँ हूँ कि लहजे में तिरे
वो खुला पन है कि दीवार हुआ जाता है

गुफ्तुगू उन से रोज होती है
मुद्दतों सामना नहीं होता

भरी जो हसरत ओ यास अपनी गुफ्तुगू में है
खुदा ही जाने कि बंदा किस आरजू में है

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