Gulam Shayari (2022-23)

Gulam Shayari In Hindi | गुलाम शायरी हिंदी में

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Gulam Shayari
सायों की जद में आ गईं सारी गुलाम गर्दिशें
अब तो कनीज के लिए राह ए फरार भी नहीं

बरसों गुल ए खुर्शीद ओ गुल ए माह को देखा
ताजा कोई दिखलाए हमें चर्ख ए कुहन फूल

अता उसी की है ये शहद ओ शोर की तौफीक
वही गलीम में ये नान ए बे जवीं लाया

वो शख्स यादों का मुझ को गुलाम करते हुए
गया भी तो मिरी नींदें हराम करते हुए

गुरूर ए हुस्न न कर जज्बा ए जुलेखा देख
किया है इश्क ने यूसुफ गुलाम आशिक का

हैं जितने मोहरे यहाँ सारे पिटने वाले हैं
किसे मैं शह करूँ अपना किसे गुलाम करूँ

किस लिए दावा ए जुलेखाई
गैर यूसुफ नहीं गुलाम नहीं

साहब ने इस गुलाम को आजाद कर दिया
लो बंदगी कि छूट गए बंदगी से हम

है अफ्सोस ऐ उम्र जाने का तेरे
कि तू मेरे पास एक मुद्दत रही है

अदा को तिरी मेरा जी जानता है
हरीफ अपना हर कोई पहचानता है

इश्क में खूब नीं बहुत रोना
इस से इफशा ए राज होता है

अबस घर से अपने निकाले है तू
भला हम तुझे छोड़ कर जाएँगे

कब इस जी की हालत कोई जानता है
जो जी जानता है सो जी जानता है

खूब रू खूब काम करते हैं
यक निगह में गुलाम करते हैं

तुझ बिन इक दल हो पास रहता है
वो भी अक्सर उदास रहता है

यार गर पूछे तो कीजे कुछ अर्ज
बात पर बात कही जाती है

दीन ओ दुनिया का जो नहीं पाबंद
वो फरागत तमाम रखता है

आह अब खुद्दारी ए अकबर कहाँ
हो गई वो भी गुलाम ए आरजू

कभी हाथ भी आएगा यार सच कह
या यूँही तू बातें बनाता रहेगा

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