Gum Shayari (2022-23)

Gum Shayari In Hindi | गुम शायरी हिंदी में

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Gum Shayari (2022-23) In Hindi

Gum Shayari
जिंदगी गुम न दोस्ती गुम है
ये हकीकत है आदमी गुम है

गुम शुदा मैं हूँ तो हर सम्त भी गुम है मुझ में
देखता हूँ वो किधर ढूँडने जाता है मुझे

शोरिश ए वक्त हुई वक्त की रफ्तार में गुम
दिन गुजरते हैं तिरे ख्वाब के आसार में गुम

Gum Shayari (2022-23) हिंदी में

एक मज्जूब उदासी मेरे अंदर गुम है
इस समुंदर में कोई और समुंदर गुम है

Gum Shayari (2022-23) 2 line

गुम तो होना था ब हर हाल किसी मंजर में
दिल हुआ ख्वाब में गुम आँख हुई आब में गुम

जर्रे में गुम हजार सहरा
कतरे में मुहीत लाख कुल्जुम

तुझ जुल्फ में दिल ने गुम किया राह
इस प्रेम गली कूँ इंतिहा नईं

दिल हसन ऐसे गुम हुए कि सदा
एक को एक का सुराग रहा

एक बस्ती थी हुई वक्त के अंदोह में गुम
चाहने वाले बहुत अपने पुराने थे उधर

तोड़ कर निकले कफस तो गुम थी राह ए आशियाँ
वो अमल तदबीर का था ये अमल तकदीर का

सितारे गुम हुए खुर्शीद निकला
अरक जब यार ने पोंछा जबीं से

अक्ल गुम है दिल परेशाँ है नजर बेताब है
जुस्तुजू से भी नहीं मिलता सुराग ए जि़ंदगी

नजर गुम हो गई जल्वों में आरिफ
अँधेरा कर दिया है रौशनी ने

था किसी गुम कर्दा ए मंजिल का नक्श ए बे सबात
जिस को मीर ए कारवाँ का नक्श ए पा समझा था में

अपनी अपनी जात में गुम हैं अहल ए दिल भी अहल ए नजर भी
महफिल में दिल क्यूँकर बहले महफिल में तन्हाई बहुत है

गुम हुआ जाता है कोई मंजिलों की गर्द में
जिंदगी भर की मसाफत राएगाँ होने को है

ये डर है काफिले वालो कहीं न गुम कर दे
मिरा ही अपना उठाया हुआ गुबार मुझे

मैं कि तेरे ध्यान में गुम था
दुनिया मुझ को ढूँढ रही थी

किताब ए आरजू के गुम शुदा कुछ बाब रक्खे हैं
तिरे तकिए के नीचे भी हमारे ख्वाब रक्खे हैं

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