Had Shayari (2022-23)

Had Shayari In Hindi | शायरी हिंदी में

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Had Shayari
बे नियाजी हद से गुजरी बंदा परवर कब तलक
हम कहेंगे हाल ए दिल और आप फरमावेंगे क्या

हवस परस्त अदीबों पे हद लगे कोई
तबाह करते हैं लफ्जों की इस्मतें क्या क्या

ताबिश जो गुजरती ही नहीं शाम की हद से
सोचें तो वहीं रात सहर खेज बहुत है

हद से गुजरा जब इंतिजार तिरा
मौत का हम ने इंतिजार किया

हमारी जिंदगी कहने की हद तक जिंदगी है बस
ये शीराजा भी देखा जाए तो बरहम है बरसों से

इश्क की राह में यूँ हद से गुजर मत जाना
हों घड़े कच्चे तो दरिया में उतर मत जाना

जफर वहाँ कि जहाँ हो कोई भी हद काएम
फकत बशर नहीं होता खुदा भी होता है

दर्द की हद से गुजरना तो अभी बाकी है
टूट कर मेरा बिखरना तो अभी बाकी है

कुर्बतें हद से गुजर जाएँ तो गम मिलते हैं
हम इसी वास्ते हर शख्स से कम मिलते हैं

मसर्रत और गम दोनों की कोई हद जरूरी है
किसी भी एक शय का सिलसिला अच्छा नहीं लगता

ये दिल हद से गुजरना चाहता था
मगर मजबूर हो कर रह गया है

कुव्वत ए फिक्र भी दी ऐसे कि इक हद में रहो
यानी बे कार समझदार बनाए गए हम

मोहब्बत की तो कोई हद, कोई सरहद नहीं होती
हमारे दरमियाँ ये फासले, कैसे निकल आए

गम तो हो हद से सिवा और अश्क अफ्शानी न हो
उस से पूछो जिस का घर जलता हो और पानी न हो

वो जुल्म भी अब जुल्म की हद तक नहीं करते
आखिर उन्हें किस बात का एहसास हुआ है

हद बंदी ए खिजाँ से हिसार ए बहार तक
जाँ रक्स कर सके तो कोई फासला नहीं

इक बेवफा के प्यार में हद से गुजर गए
काफिर के प्यार ने हमें काफिर बना दिया

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