Haisiyat Shayari (2022-23)

Haisiyat Shayari In Hindi | हैसियत शायरी हिंदी में

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Haisiyat Shayari (2022-23) In Hindi

Haisiyat Shayari
बहुत कम हैसियत में नक्द ए जाँ है
खुदा की राह का सौदा गिराँ है

सय्यद मसूद हसन मसूद
मैं अपनी हैसियत से कुछ जियादा ले के आया हूँ
मैं कतरा हूँ मगर हमराह दरिया ले के आया हूँ

जमाना लाख समझता हो अहमियत मेरी
मिरी नजर में नहीं कोई हैसियत मेरी

Haisiyat Shayari (2022-23) हिंदी में

बढ़ी है हैसियत फिर भी मगर क्यों
मेरे अरमान घटते जा रहे हैं

Haisiyat Shayari (2022-23) 2 line

जमाँ शनासी तो कुछ हैसियत नहीं रखती
कि अपने घर की नहीं जब कोई खबर मुझ को

जमीं के चाँद नुमाओं की हैसियत क्या है
कि चाँद है जो सर ए आसमान मेरा है

फकीह ए शहर के फतवे की हैसियत क्या है
तो खुद को अपनी निगाहों में सुर्ख रू रखना

हैसियत क्या है तहजीब ओ अकदार की
कोरे कागज पे हैं खामा फरसाइयाँ

इम्तिहाँ लेती है कुदरत हैसियत को देख कर
कहकहे उन को मिले हैं अश्क अफ्शानी मुझे

हमारे अश्क यहाँ हैसियत नहीं रखते
तुम्हारे अश्कों की सौगात कीमती है बहुत

आग से खेलने को पतंगा बढ़ा
हैसियत देखिए हौसला देखिए

शम्स से जाने क्यों मोहब्बत की
आप की हैसियत दियों तक है

दोस्तों से जा कर जब मशवरा किया तो फिर
मैं ने कुछ नहीं लिखा हैसियत के खाने में

जिएँगे गरचे हम हादी यहाँ बे हैसियत बन कर
मगर हर जर्रे पर अपनी निशानी छोड़ जाएँगे

ब ए तिबार ए इल्म जिन की हैसियत फकीर सी
ब ए तिबार माल ओ जर वो साहब ए निसाब हैं

तुम्हारे प्यार ने मशहूर कर दिया वर्ना
मैं इक गरीब भला क्या है हैसियत मेरी

थी हमारी हैसियत इस शहर में मे मार की
हम ने छत ता मीर की आराम औरों को मिला

मगर कितने सूरज हैं दुश्मन मिरे
मिरी हैसियत एक जर्रा सही

अगर था उस को मिरी हैसियत का अंदाजा
तो क्यूँ वो अपना खरीदार करने आया था

अज्मतें सब तिरी खुदाई की
हैसियत क्या मिरी इकाई की

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