हसरत शायरी | Hasrat Shayari

Hasrat Shayari | हसरत शायरी

Hasrat Shayari In Hindi | हसरत शायरी हिंदी में

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Hasrat Shayari

दर अस्ल हैं वही हसरत
सुनते ही दिल में जो उतर जाएँ

दावा ए आशिकी है तो हसरत करो निबाह
ये क्या के इब्तिदा ही में घबरा के रह गए

मेरे भी हैं पुर दर्द व लेकिन हसरत
मीर का शेवा ए गुफ्तार कहाँ से लाऊँ

मैं हसरत मुज्तहिद हूँ बुत परस्ती की तरीकत का
न पूछो मुझ को कैसा कुफ्र है इस्लाम क्या होगा

हसरत की भी कुबूल हो मथुरा में हाजिरी
सुनते हैं आशिकों पे तुम्हारा करम है आज

गम ए आरजू का हसरत सबब और क्या बताऊँ
मिरी हिम्मतों की पस्ती मिरे शौक की बुलंदी

सौगंद है हसरत मुझे एजाज ए सुखन की
ये सेहर हैं जादू हैं न अशआ र हैं तेरे

देवता बनने की हसरत में मुअल्लक हो गए
अब जरा नीचे उतरिए आदमी बन जाइए

आरजू हसरत और उम्मीद शिकायत आँसू
इक तिरा जिक्र था और बीच में क्या क्या निकला

हसरत जो सुन रहे हैं वो अहल ए वफा का हाल
इस में भी कुछ फरेब तिरी दास्ताँ के हैं

हकीकत खुल गई हसरत तिरे तर्क ए मोहब्बत की
तुझे तो अब वो पहले से भी बढ़ कर याद आते हैं

मैं गहरे पानियों को चीर देता हूँ मगर हसरत
जहाँ पानी बहुत कम हो वहाँ मैं डूब जाता हूँ

अश्क ए हसरत है आज तूफाँ खेज
कश्ती ए चश्म की तबाही है

कहने को लफ्ज दो हैं उम्मीद और हसरत
इन में निहाँ मगर इक दुनिया की दास्ताँ है

कहीं ऐसा न हो मर जाऊँ मैं हसरत ही हसरत में
जो लेना हो तो ले लो सब से पहले इम्तिहाँ मेरा

कहाँ हम कहाँ वस्ल ए जानाँ की हसरत
बहुत है उन्हें इक नजर देख लेना

बाकी है दिल में शैख के हसरत गुनाह की
काला करेगा मुँह भी जो दाढ़ी सियाह की

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