हाथ शायरी | Hath Shayari

Hath Shayari | हाथ शायरी

Hath Shayari In Hindi | हाथ शायरी हिंदी में

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Hath Shayari
जरा ये हाथ मेरे हाथ में दो
मैं अपनी दोस्ती से थक चुका हूँ

दे के दिल उस के हाथ अपने हाथ
हम ने सौदा किया है दस्त ब दस्त

इक अजनबी के हाथ में दे कर हमारा हाथ
लो साथ छोड़ने लगा आखिर ये साल भी

मत पोंछ अबरू ए अरक आलूद हाथ से
लाजिम है एहतियात कि है आब दार तेग

शोरीदगी के हाथ से है सर वबाल ए दोश
सहरा में ऐ खुदा कोई दीवार भी नहीं

तेग बर दोश सिपर हाथ में दामन गर्दां
ये बना सूरत ए खूँ ख्वार कहाँ जाना है

बंद ए कबा पे हाथ है शरमाए जाते हैं
कमसिन हैं जिक्र ए वस्ल से घबराए जाते हैं

अल्लाह तेरे हाथ है अब आबरू ए शौक
दम घुट रहा है वक्त की रफ्तार देख कर

शायद हमारे हिज्र में लफ्जों का हाथ था
इक लफ्ज ए गैर ने तो पराया ही कर दिया

जाम ए अकीक जर्द है नर्गिस के हाथ में
तक्सीम कर रहा है मय ए अर्गवाँ बसंत

वो जिस के हाथ से तकरीब ए दिल नुमाई थी
अभी वो लम्हा ए मौजूद में नहीं आया

शजर के कत्ल में इस का भी हाथ है शायद
बता रहा है ये बाद ए सबा का चुप रहना

हाथ दिखला के ये बोला वो मुसलमाँ जादा
हो गया दस्त ए निगर अब तो बरहमन अपना

जरा उन की शोखी तो देखना लिए जुल्फ ए खम शुदा हाथ में
मेरे पास आए दबे दबे मुझे साँप कह के डरा दिया

दरिया ए हुस्न और भी दो हाथ बढ़ गया
अंगड़ाई उस ने नश्शे में ली जब उठा के हाथ

मश्शाता देख शाने से तेरा कटेगा हाथ
टूटा गर एक बाल कभू जुल्फ ए यार का

हजरत ए वाइज न ऐसा वक्त हाथ आएगा फिर
सब हैं बे खुद तुम भी पी लो कुछ अगर शीशे में है

हमारे शीशा ए दिल को सँभल कर हाथ में लेना
नजाकत इस में इतनी है नजर से जब गिरा टूटा

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