Hawas Shayari हवस शायरी हिंदी में (2022-23)

Hawas Shayari In Hindi | हवस शायरी हिंदी में

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Hawas Shayari
सहरा में हवस खार ए मुगीलाँ की मदद से
बारे मिरा खूँ हर खस ओ खाशाक को पहुँचा

अहल ए हवस तो खैर हवस में हुए जलील
वो भी हुए खराब, मोहब्बत जिन्हों ने की

मेरी हवस को ऐश ए दो आलम भी था कुबूल
तेरा करम कि तू ने दिया दिल दुखा हुआ

हवस की धूप में फैला है शोर ए खल्क ए खुदा
सुना किसी ने नहीं बस्तियों में गिर्या ए खाक

अब रकीब ए बुल हवस हैं इश्क बाज
दिल लगाने से भी नफरत हो गई

हशमत ए दुनिया की कुछ दिल में हवस बाकी नहीं
इश्क की दौलत से हैं ऐसे ही आली जाह हम

आश्ना कोई नजर आता नहीं याँ ऐ हवस
किस को मैं अपना अनीस ए कुंज ए तन्हाई करूँ

नियाज ए इश्क खिर्मन सोज ए अस्बाब ए हवस बेहतर
जो हो जावे निसार ए बर्क मुश्त ए खार ओ खस बेहतर

इश्क बाजी बुल हवस बाजी न जान
इश्क है ये खाना ए खाला नहीं

हवस शामिल है थोड़ी सी दुआ में
अभी इस लौ में हल्का सा धुआँ है

हवस हम पार होएँ क्यूँकि दरिया ए मोहब्बत से
कजा ने बादबान ए कशती ए तदबीर को तोड़ा

पहले पहले हवस इक आध दुकाँ खोलती है
फिर तो बाजार के बाजार से लग जाते हैं

आग और धुआँ और हवस और है इश्क और
हर हौसला ए दिल को मोहब्बत नहीं कहते

कौन से शौक किस हवस का नहीं
दिल मिरी जान तेरे बस का नहीं

हवस ने तोड़ दी बरसों की साधना मेरी
गुनाह क्या है ये जाना मगर गुनाह के बअ द

किस दर्जा मुनाफिक हैं सब अहल ए हवस साकिब
अंदर से तो पत्थर हैं और लगते हैं पानी से

ऐ मुकल्लिद बुल हवस हम से न कर दावा ए इश्क
दाग लाला की तरह रखते हैं मादर जाद हम

कहाँ का इश्क हवस तक भी हो नहीं सकती
यही रहेगा जो अंदाज मुजरिमाना मिरा

जिस की हवस के वास्ते दुनिया हुई अजीज
वापस हुए तो उस की मोहब्बत खफा मिली

मैं तेरी चाह में झूटा हवस में सच्चा हूँ
बुरा समझ ले मगर दूसरों से अच्छा हूँ

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