हिम्मत शायरी | Himmat Shayari

Himmat Shayari | हिम्मत शायरी

Himmat Shayari In Hindi | हिम्मत शायरी हिंदी में

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Himmat Shayari
दश्त ए जुनूँ की खाक उड़ाने वालों की हिम्मत देखो
टूट चुके हैं अंदर से लेकिन मन मानी बाकी है

हिम्मत वाले पल में बदल देते हैं दुनिया को
सोचने वाला दिल तो बैठा सोचा करता है

हिम्मत का जाहिदों की सरासर कुसूर था
मय खाना खानकाह से ऐसा न दूर था

मुश्किल का सामना हो तो हिम्मत न हारिए
हिम्मत है शर्त साहिब ए हिम्मत से क्या न हो

अब याद ए रफ्तगाँ की भी हिम्मत नहीं रही
यारों ने कितनी दूर बसाई हैं बस्तियाँ

वहाँ से है मिरी हिम्मत की इब्तिदा वल्लाह
जो इंतिहा है तिरे सब्र आजमाने की

बहुत हिम्मत का है ये काम शारिक
कि शरमाते नहीं डरते हुए हम

हिम्मत है तो बुलंद कर आवाज का अलम
चुप बैठने से हल नहीं होने का मसअला

जरा दरिया की तह तक तो पहुँच जाने की हिम्मत कर
तो फिर ऐ डूबने वाले किनारा ही किनारा है

इसे भी जफर मेरी हिम्मत ही समझो
कहीं हो न पाया कहीं हो गया हूँ

भारत के ऐ सपूतो हिम्मत दिखाए जाओ
दुनिया के दिल पे अपना सिक्का बिठाए जाओ

काम क्या है प नहीं चाहती हिम्मत हरगिज
गैर के घर से दिया कीजिए रौशन अपना

अहल ए हिम्मत को बलाओं पे हँसी आती है
नंग ए हस्ती है मुसीबत में परेशाँ होना

कुछ कटी हिम्मत ए सवाल में उम्र
कुछ उमीद ए जवाब में गुजरी

रात कितनी गुजर गई लेकिन
इतनी हिम्मत नहीं कि घर जाएँ

सर पे तूफान भी है सामने गिर्दाब भी है
मेरी हिम्मत कि वही कच्चा घड़ा है देखो

खुद पे क्या बीत गई इतने दिनों में तुझ बिन
ये भी हिम्मत नहीं अब झाँक के अंदर देखूँ

कठिन है काम तो हिम्मत से काम ले ऐ दिल
बिगाड़ काम न मुश्किल समझ के मुश्किल को

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