Hukumat Shayari हुकूमत शायरी हिंदी में (2022-23)

Hukumat Shayari In Hindi | हुकुमत शायरी हिंदी में

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Hukumat Shayari

जम्हूरियत इक तर्ज ए हुकूमत है कि जिस में
बंदों को गिना करते हैं तौला नहीं करते

हुस्न इक दिलरुबा हुकूमत है
इश्क इक कुदरती गुलामी है

क्या खत्म न होगी कभी सहरा की हुकूमत
रस्ते में कहीं तो दर ओ दीवार भी आए

एक आँसू भी हुकूमत के लिए खतरा है
तुम ने देखा नहीं आँखों का समुंदर होना

हुई न आम जहाँ में कभी हुकूमत ए इश्क
सबब ये है कि मोहब्बत जमाना साज नहीं

इस दौर ए आखिरी की जहालत तो देखिए
जिस की जबाँ दराज हुकूमत उसी की है

इधर तेरी मशिय्यत है उधर हिकमत रसूलों की
इलाही आदमी के बाब में क्या हुक्म होता है

नहीं मालूम क्या हिकमत है शैख इस आफरीनश की
हमें ऐसा खराबाती किया तुझ को मुनाजाती

की मोहब्बत तो सियासत का चलन छोड़ दिया
हम अगर इश्क न करते तो हुकूमत करते

देख कर शाइ र ने उस को नुक्ता ए हिकमत कहा
और बे सोचे जमाने ने उसे औरत कहा

फिल हकीकत कोई नहीं मरता
मौत हिकमत का एक पर्दा है

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