Humsafar Shayari | हमसफर शायरी 321+

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राह भी तुम हो राहत भी तुम ही हो,
मेरे सुख और दुख को बांटने वाली हमसफर भी तुम ही हो.

 

मंजिल मिलने से दोस्ती भुलाई नहीं जाती,
हमसफ़र मिलने से दोस्ती मिटाई नहीं जाती,
दोस्त की कमी हर पल रहती है यार,
दूरियों से दोस्ती छुपाई नहीं जाती।

 

‏ये सितम की रात हैं ढलने को है अन्धेरा गम को पिघलने को है,
ज़रा देर इस में लगे अगर ना उदास हो मेरे हमसफ़र.

 

दर्द की दास्ताँ अभी बाकी है,
महोबत का इम्तेहान अभी बाकी है,
दिल करे तो फिर से वफ़ा करने आ जाना,
दिल ही तो टुटा है, जान अभी बाकी है..

 

फिरते हैं कब से दरबदर अब इस नगर अब उस नगर
एक दूसरे के हमसफ़र, मैं और मेरी आवारगी