Husn Shayari हुस्न शायरी हिंदी में (2022-23)

Husn Shayari In Hindi | हुस्न शायरी हिंदी में

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Husn Shayari

अफ्सुर्दगी भी हुस्न है ताबिंदगी भी हुस्न
हम को खिजाँ ने तुम को सँवारा बहार ने

हुस्न हर हाल में है हुस्न परागंदा नकाब
कोई पर्दा है न चिलमन ये कोई क्या जाने

अभी है हुस्न में हुस्न ए नजर की कार फरमाई
अभी से क्या बताएँ हम कि वो कैसा निकलता है

ये शबाब ए हुस्न ये हुस्न ए शबाब
हश्र तक उन पर यही आलम रहे

हुस्न और इश्क हैं दोनों काफिर
दोनों में इक झगड़ा सा है

हजार हुस्न दिल आरा ए दो जहाँ होता
नसीब इश्क न होता तो राएगाँ होता

या हुस्न है ना वाकिफ ए पिंदार ए मोहब्बत
या इश्क ही आसानी ए अतवार में गुम है

हुस्न है दाद ए खुदा इश्क है इमदाद ए खुदा
गैर का दख्ल नहीं बख्त है अपना अपना

दिल हुस्न को दान दे रहा हूँ
गाहक को दुकान दे रहा हूँ

हुस्न यूँ इश्क से नाराज है अब
फूल खुश्बू से खफा हो जैसे

अल्लाह अल्लाह हुस्न की ये पर्दा दारी देखिए
भेद जिस ने खोलना चाहा वो दीवाना हुआ

तुम्हारा हुस्न आराइश तुम्हारी सादगी जेवर
तुम्हें कोई जरूरत ही नहीं बनने सँवरने की

हुस्न को हुस्न बनाने में मिरा हाथ भी है
आप मुझ को नजर अंदाज नहीं कर सकते

तेरी दुनिया में तिरे हुस्न का शैदाई हूँ
ऐ खुदा मुझ को गुनहगार न समझा जाए

हुस्न की बे रुखी को अहल ए नजर
हासिल ए इल्तिफात कहते हैं

इश्क क्या शय है हुस्न है क्या चीज
कुछ इधर की है कुछ उधर की आग

जमाना हुस्न नजाकत बला जफा शोखी
सिमट के आ गए सब आप की अदाओं में

अपने मरकज की तरफ माइल ए परवाज था हुस्न
भूलता ही नहीं आलम तिरी अंगड़ाई का

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