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हमने पढ़ाई-लिखाई नही किया तो अनपढ़-गवार हुए,
क्या शिक्षित लोग पर्यावरण प्रदूषित करके शर्मसार हुए.

 

मैं गाँव का छोरा, तू शहर की छोरी,
मैं अनपढ़-गंवार, तू पढ़ी-लिखी गोरी,
अपना मिलन इतना आसान नही है,
प्रेम में सबको दिखता भगवान नही है.

 

अनपढ़ बहू घर-परिवार को खिलाकर खाती है,
पढ़ी-लिखी बहू तो रेस्टोरेंट से खाकर आती है.

 

अनपढ़ कहाँ किसी को धोखा दे पाते है,
सारी चालाकियाँ पढ़े-लिखे लोग सीख जाते है.

 

पढ़ाई आपको शिक्षा दे सकती है मगर संस्कार नही,
पैसा सब कुछ दे सकता है मगर माँ-बाप का प्यार नही.