Jagah Shayari जगह शायरी हिंदी में (2022-23)

Jagah Shayari In Hindi | जगह शायरी हिंदी में

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Jagah Shayari जगह शायरी हिंदी में (2022-23) In Hindi

Jagah Shayari

तेग बाजी का शौक अपनी जगह
आप तो कत्ल ए आम कर रहे हैं

इश्क खुद अपनी जगह मजहर ए अनवार ए खुदा
अक्ल इस सोच में गुम किस को खुदा कहते हैं

Jagah Shayari जगह शायरी हिंदी में (2022-23) हिंदी में

हर तरफ हर जगह बे शुमार आदमी
फिर भी तन्हाइयों का शिकार आदमी

Jagah Shayari जगह शायरी हिंदी में (2022-23) 2 line

वो शख्स अपनी जगह है मुरक्का ए तहजीब
ये और बात है कि कातिल उसी का नाम भी है

अब जमीं भी जगह नहीं देती
हम कभी आसमाँ पे रहते थे

डहा खड़ा है हजारों जगह से कस्र ए वजूद
बताऊँ कौन सी उस की मैं उस्तुवार तरफ

हर इक जगह तिरी बर्क ए निगाह दौड़ गई
गरज ये है कि किसी चीज को करार न हो

हर दुकाँ अपनी जगह हैरत ए नज्जारा है
फिक्र ए इंसाँ के सजाए हुए बाजार तो देख

वाइ ज ये मय कदा है न मस्जिद कि इस जगह
जिक्र ए हलाल पर भी है फतवा हराम का

तुम्हारी शोख नजर इक जगह कभी न रही
न ये थमी न ये ठहरी न ये रुकी न रही

बारा वफातें बीसवीं झड़ियाँ हैं सौ जगह
ऐ खानमाँ खराब जो मिलना है मिल कहीं

जब मय कदा छुटा तो फिर अब क्या जगह की कैद
मस्जिद हो मदरसा हो कोई खानकाह हो

कभी मदफून हुए थे जिस जगह पर कुश्ता ए अबरू
अभी तक इस जमीं से सैकड़ों खंजर निकलते हैं

चीजें अपनी जगह पे रहती हैं
तीरगी बस उन्हें छुपाती है

हमें पीने से मतलब है जगह की कैद क्या बेखुद
उसी का नाम जन्नत रख दिया बोतल जहाँ रख दी

सरा ए दिल में जगह दे तो काट लूँ इक रात
नहीं है शर्त कि मुझ को शरीक ए ख्वाब बना

धूप जवानी का याराना अपनी जगह
थक जाता है जिस्म तो साया माँगता है

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