Jahar Shayari जहर शायरी हिंदी में (2022-23)

Jahar Shayari In Hindi | जहर शायरी हिंदी में

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Jahar Shayari
खाइए ये जहर कब तक खाए जाती है ये जीस्त
ऐ अजल कब तक रहेंगे रहन ए आब ओ दाना हम

जाहिर परस्त खल्क है जाहिर दुरुस्त कर
कैसे सिफात ओ जात जो कुछ है लिबास है

जाहिर न था नहीं सही लेकिन जुहूर था
कुछ क्यूँ न था जहान में कुछ तो जरूर था

जुदाइयों की खलिश उस ने भी न जाहिर की
छुपाए अपने गम ओ इज्तिराब मैं ने भी

बदन पर कुछ मिरे जाहिर नहीं और दिल में सोजिश है
खुदा जाने ये किस ने राख अंदर आग दाबी है

क्यूँकि होवे जाहिद खुद बीं मुरीद ए जुल्फ ए यार
उस ने सारी उम्र में जुन्नार कूँ देखा न था

खुली जबान तो जर्फ उन का हो गया जाहिर
हजार भेद छुपा रक्खे थे खमोशी में

वो तो था आदमी की तरह जहीर
उस का चेहरा फरिश्तों जैसा था

जाहिद शराब ए नाब हो या बादा ए तुहूर
पीने ही पर जब आए हराम ओ हलाल क्या

मुवाफकत करे क्यूँ मय कशों सती जाहिद
इधर शराब उधर मस्जिद ओ मुसल्ला है

हमारे मय कदे में हैं जो कुछ की निय्यतें जाहिर
कब इस खूबी से ऐ जाहिद तिरा बैत ए हरम होगा

ब जाहिर गर्म है बाजार ए उल्फत
मगर जिंस ए वफा कम हो गई है

मय कदे की तरफ चला जाहिद
सुब्ह का भूला शाम घर आया

दिखाऊँगा तुझे जाहिद उस आफत ए दीं को
खलल दिमाग में तेरे है पारसाई का

करते हैं मस्जिदों में शिकवा ए मस्ताँ जाहिद
या नी आँखों का भवों से ये गिला करते हैं

जोश ए रहमत के वास्ते जाहिद
है जरा सी गुनाह गारी शर्त

सच कहा जाहिद ये तू ने जहर ए कातिल है शराब
हम भी कहते थे यही जब तक बहार आई न थी

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