Jalna Shayari जलना शायरी हिंदी में (2022-23)

Jalna Shayari In Hindi | जलना शायरी हिंदी में

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Jalna Shayari
खमोश जलने का दिल के कोई गवाह नहीं
कि शो ला सुर्ख नहीं है धुआँ स्याह नहीं

आशियाँ जलने पे बुनियाद नई पड़ती है
अक्स ए तखरीब को आईना ए तामीर कहो

शाम होने को है जलने को है शम ए महफिल
साँस लेने की भी फुर्सत नहीं परवाने को

मिरे दागों से जलने का सबक लेता है परवाना
मिरे नालों से बुलबुल सीखने फरियाद आती है

होते ही शाम जलने लगा याद का अलाव
आँसू सुनाने दुख की कहानी निकल पड़े

अपने जलने में किसी को नहीं करते हैं शरीक
रात हो जाए तो हम शम्अ बुझा देते हैं

सिवाए मेरे किसी को जलने का होश कब था
चराग की लौ बुलंद थी और रात कम थी

मुसलसल धूप में चलना चरागों की तरह जलना
ये हंगामे तो मुझ को वक्त से पहले थका देंगे

हुनूज रात है जलना पड़ेगा उस को भी
कि मेरे साथ पिघलना पड़ेगा उस को भी

जब ये जिस्म सुलगता है तो रूह भी जलने लगती है
परवाने का इश्क मुकम्मल होता है जल जाने में

शम्अ की तरह से जलना सीख औरों के लिए
गर तमन्ना दिल में है तो रौनक ए महफिल बने

रात भर ख्वाब में जलना भी इक बीमारी है
इश्क की आग से बचने में समझदारी है

जब घर की आग बुझी तो कुछ सामान बचा था जलने से
सो वो भी उन के हाथ लगा जो आग बुझाने आए थे

चराग अब खून से जलने लगे हैं
बहुत दिन से हवा खाली पड़ी है

खाक में मिलना था आखिर बे निशाँ होना ही था
जलने वाले के मुकद्दर में धुआँ होना ही था

आग तो चारों ही जानिब थी पर अच्छा ये है
होश मंदी से किसी चीज को जलने न दिया

समझता हूँ सबब काफिर तिरे आँसू निकलने का
धुआँ लगता है आँखों में किसी के दिल के जलने का

ये कैसी आग है मुझ में कि एक मुद्दत से
तमाशा देख रहा हूँ मैं अपने जलने का

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